Uttarakhand Test 116- 2026 Free Mock Test

Uttarakhand Test 116 – UKSSSC & UKPSC 2026 Extreme Hard Mock Test | GyanLeela
UKPSC • UKSSSC • Extreme Hard
Test 116 • 30 प्रश्न

📈 उत्तराखंड टेस्ट 116

13 August 2026 • विश्व अंगदान दिवस • Extreme Hard

📋 टेस्ट की जानकारी

  • 📌 कुल प्रश्न: 30 प्रश्न
  • ⏱️ कुल समय: 20 मिनट
  • प्रत्येक सही: 1 अंक
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  • 📝 टेस्ट कैसे दें: सही विकल्प पर क्लिक/टच करें

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🔑 उत्तर कुंजी

BNSS की धारा 176(3): 7 साल या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच क्यों जरूरी है?

भारतीय आपराधिक न्याय व्यवस्था में नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद जांच प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इनमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के तहत फॉरेंसिक जांच को अधिक महत्व देना एक महत्वपूर्ण कदम है।

विशेष रूप से गंभीर अपराधों की जांच में वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों का उपयोग बढ़ाने के उद्देश्य से BNSS की धारा 176(3) में महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है।

प्रश्न: BNSS की धारा 176(3) के तहत फॉरेंसिक टीम का अपराध स्थल पर जाना किन मामलों में अनिवार्य है?

(A) केवल हत्या के मामलों में
(B) केवल महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में
(C) उन अपराधों में जिनमें 7 वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है
(D) प्रत्येक संज्ञेय अपराध में

सही उत्तर: (C) उन अपराधों में जिनमें 7 वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है।

BNSS की धारा 176(3) क्या कहती है?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ने गंभीर अपराधों की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों को महत्वपूर्ण स्थान दिया है। धारा 176(3) के अनुसार, ऐसे अपराध जिनमें सात वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, उनमें राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित तिथि से पुलिस अधिकारी को फॉरेंसिक विशेषज्ञ को अपराध स्थल पर भेजना होता है।

फॉरेंसिक विशेषज्ञ अपराध स्थल से महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करने में सहायता करते हैं। साथ ही अपराध स्थल की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जाती है।

इस प्रावधान का उद्देश्य क्या है?

इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य आपराधिक जांच को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित बनाना है।

पारंपरिक जांच में प्रत्यक्षदर्शी, दस्तावेज और अन्य मौखिक या परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर काफी निर्भरता रहती थी। फॉरेंसिक जांच के माध्यम से अब घटनास्थल से प्राप्त वैज्ञानिक साक्ष्यों को भी अधिक व्यवस्थित तरीके से जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।

उदाहरण के लिए अपराध स्थल से प्राप्त:

  • फिंगरप्रिंट
  • DNA साक्ष्य
  • रक्त के नमूने
  • हथियारों से संबंधित साक्ष्य
  • जैविक नमूने
  • अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य

जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

प्रतियोगी परीक्षाओं में इस प्रावधान से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इसलिए निम्न बिंदु याद रखें:

BNSS — भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

धारा — 176(3)

मुख्य विषय — गंभीर अपराधों में फॉरेंसिक जांच

सजा की सीमा — 7 वर्ष या उससे अधिक

महत्वपूर्ण प्रक्रिया — अपराध स्थल पर फॉरेंसिक विशेषज्ञ और वीडियोग्राफी

निष्कर्ष

BNSS की धारा 176(3) भारतीय आपराधिक जांच व्यवस्था में वैज्ञानिक साक्ष्यों के महत्व को मजबूत करती है। इसका उद्देश्य गंभीर अपराधों की जांच को अधिक विश्वसनीय और आधुनिक बनाना है।

परीक्षा में एक लाइन में याद रखें:

“सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराध — फॉरेंसिक विशेषज्ञ + अपराध स्थल की वीडियोग्राफी।”

यह प्रावधान PCS, RO/ARO, SSC, पुलिस भर्ती, न्यायिक सेवा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

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