📈 उत्तराखंड टेस्ट 121
📋 टेस्ट की जानकारी
- 📌 कुल प्रश्न: 30 प्रश्न
- ⏱️ कुल समय: 20 मिनट
- ✅ प्रत्येक सही: 1 अंक
- ❌ नेगेटिव मार्किंग: -0.25
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🔑 उत्तर कुंजी
अनुच्छेद 200: राज्यपाल की विधेयक संबंधी शक्तियाँ
भारतीय संविधान में राज्यपाल को राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों के संबंध में महत्वपूर्ण संवैधानिक शक्तियाँ प्रदान की गई हैं। अनुच्छेद 200 के अंतर्गत जब किसी राज्य की विधानसभा द्वारा कोई विधेयक पारित किया जाता है और उसे राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो राज्यपाल के पास मुख्यतः तीन विकल्प होते हैं—वह विधेयक को अपनी स्वीकृति दे सकता है, स्वीकृति रोक सकता है या कुछ परिस्थितियों में विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रख सकता है।
यदि विधेयक धन विधेयक नहीं है, तो राज्यपाल उसे पुनर्विचार के लिए राज्य विधानमंडल को वापस भेज सकता है। हालांकि, यदि वही विधेयक पुनः पारित होकर राज्यपाल के पास आता है, तो सामान्यतः राज्यपाल उसे रोक नहीं सकता और उसे स्वीकृति देनी होती है।
कुछ विशेष परिस्थितियों में राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रख सकता है। विशेष रूप से ऐसा तब महत्वपूर्ण हो जाता है जब विधेयक उच्च न्यायालय की शक्तियों की स्थिति को प्रभावित कर सकता हो। ऐसे मामलों में राज्यपाल द्वारा विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है और इसके बाद उस पर अनुच्छेद 201 के प्रावधान लागू होते हैं।
यह विषय भारतीय राजव्यवस्था में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्यपाल राज्य की निर्वाचित सरकार और संघीय व्यवस्था के बीच एक संवैधानिक कड़ी के रूप में कार्य करता है। विधेयकों को रोकने या राष्ट्रपति के लिए सुरक्षित रखने की शक्ति का प्रयोग संवैधानिक प्रावधानों और न्यायिक व्याख्याओं के अधीन होता है।
परीक्षा के लिए याद रखें:
अनुच्छेद 200 — राज्यपाल की विधेयक पर स्वीकृति/अस्वीकृति/पुनर्विचार/राष्ट्रपति के लिए आरक्षण संबंधी शक्ति।
अनुच्छेद 201 — राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखे गए विधेयकों से संबंधित प्रावधान।