Uttarakhand Test 137- 2026 Free Mock Test

Uttarakhand Test 137 – UKSSSC & UKPSC 2026 Extreme Hard Mock Test | GyanLeela
UKPSC • UKSSSC • Extreme Hard
Test 137 • 30 प्रश्न

📈 उत्तराखंड टेस्ट 137

5-6 September 2026 • Extreme Hard Mock Test

📋 टेस्ट की जानकारी

  • 📌 कुल प्रश्न: 30 प्रश्न
  • ⏱️ कुल समय: 20 मिनट
  • प्रत्येक सही: 1 अंक
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🔑 उत्तर कुंजी

कुली बेगार आंदोलन: सरयू नदी में बहा दिया गया गुलामी का प्रतीक

कुली बेगार आंदोलन उत्तराखंड के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

यह आंदोलन अंग्रेजी शासन की उस प्रथा के विरोध में शुरू हुआ था, जिसमें स्थानीय लोगों से बिना उचित पारिश्रमिक के सामान ढुलवाने और अन्य सेवाएं लेने के लिए मजबूर किया जाता था। उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में इस प्रथा के खिलाफ लोगों में धीरे-धीरे व्यापक असंतोष पैदा हुआ।

कुली बेगार आंदोलन कब हुआ?

कुली बेगार आंदोलन का सबसे ऐतिहासिक पड़ाव 14 जनवरी 1921 को आया। यह दिन मकर संक्रांति और उत्तरायणी मेले का अवसर था। बागेश्वर में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। इस जनसभा में अंग्रेजी शासन की कुली बेगार व्यवस्था का खुलकर विरोध किया गया।

इस आंदोलन में बद्री दत्त पांडे सहित कई प्रमुख नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लोगों ने कुली बेगार की प्रथा को समाप्त करने का संकल्प लिया।

सरयू नदी से क्या संबंध है?

कुली बेगार आंदोलन की सबसे प्रसिद्ध घटना बागेश्वर में हुई। यहां सरयू और गोमती नदियों के संगम के पास लोगों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। कुली बेगार से जुड़े रजिस्टरों को सरयू नदी में बहा दिया गया।

इसी कारण सरयू नदी का तट उत्तराखंड के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। यह घटना अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनप्रतिरोध का प्रभावशाली प्रतीक बन गई।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न: 14 जनवरी 1921 को कुली बेगार आंदोलन से जुड़ी ऐतिहासिक घटना किस नदी के तट पर हुई?

उत्तर: सरयू नदी।

यह प्रश्न UKSSSC, UKPSC और अन्य उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

कुली बेगार आंदोलन केवल एक स्थानीय विरोध नहीं था। यह उत्तराखंड के लोगों की स्वतंत्रता, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई का महत्वपूर्ण उदाहरण था। बागेश्वर में हुआ यह आंदोलन आज भी उत्तराखंड के इतिहास में जनशक्ति और एकता के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।

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