UKSSSC TEST 17

UKSSSC / UKPSC टेस्ट 17 – Extreme Hard 30 प्रश्न | GyanLeela
UKSSSC / UKPSC 2026
टेस्ट 17 • Extreme Hard

UKSSSC / UKPSC टेस्ट 17

Extreme Hard • 30 प्रश्न • 9 अक्टूबर 2026

📋 टेस्ट की जानकारी

  • 📌 कुल प्रश्न: 30 प्रश्न (Extreme Hard)
  • ⏱️ कुल समय: 25 मिनट
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Shor’s Algorithm क्या है? क्वांटम कंप्यूटिंग से RSA Encryption को खतरा

प्रस्तावना

आज के डिजिटल युग में इंटरनेट बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान, ई-कॉमर्स और डिजिटल संचार को सुरक्षित रखने के लिए क्रिप्टोग्राफी (Cryptography) का व्यापक उपयोग किया जाता है। RSA Encryption ऐसी ही एक प्रमुख क्रिप्टोग्राफिक तकनीक है, जिसकी सुरक्षा बड़े पूर्णांकों के गुणनखंड ज्ञात करने की कठिनाई पर आधारित है। लेकिन क्वांटम कंप्यूटिंग के विकास ने इस सुरक्षा व्यवस्था के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। इस संदर्भ में Shor’s Algorithm एक महत्वपूर्ण क्वांटम एल्गोरिथम है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी उपयोगी विषय है।

Shor’s Algorithm क्या है?

Shor’s Algorithm एक क्वांटम एल्गोरिथम है, जिसे गणितज्ञ पीटर शोर (Peter Shor) ने 1994 में प्रस्तुत किया था। इसका मुख्य उद्देश्य बड़े पूर्णांकों का अभाज्य गुणनखंड (Prime Factorization) पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में संभावित रूप से अधिक कुशल तरीके से ज्ञात करना है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी संख्या के अभाज्य गुणनखंड 3 और 5 हैं, तो उसका मान 15 होगा। छोटी संख्याओं के लिए गुणनखंड निकालना आसान है, लेकिन बहुत बड़ी संख्याओं के मामले में यह कार्य पारंपरिक कंप्यूटरों के लिए अत्यंत कठिन हो सकता है।

Shor’s Algorithm क्वांटम कंप्यूटिंग की विशेषताओं का उपयोग करके इस समस्या को हल करने का एक प्रभावी सैद्धांतिक तरीका प्रदान करता है।

RSA Encryption और इसका संबंध

RSA का पूरा नाम इसके तीन आविष्कारकों रॉन रिवेस्ट (Ron Rivest),

आदि शमीर (Adi Shamir) और लियोनार्ड एडलमैन (Leonard Adleman) के नाम पर आधारित है।

RSA एक सार्वजनिक-कुंजी क्रिप्टोग्राफी प्रणाली है,

जिसका उपयोग डिजिटल संचार और कुछ डिजिटल हस्ताक्षर प्रणालियों में किया जाता है।

RSA की सुरक्षा बड़े पूर्णांकों के गुणनखंड निकालने की कठिनाई पर निर्भर करती है।

पारंपरिक कंप्यूटरों के लिए पर्याप्त बड़े और उचित रूप से चुने गए RSA मॉड्यूलस का गुणनखंड करना व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन हो सकता है।

इसके विपरीत, पर्याप्त शक्तिशाली और त्रुटि-सुधारित क्वांटम कंप्यूटर पर Shor’s Algorithm इस कठिनाई को काफी हद तक कम कर सकता है। इसलिए भविष्य में सक्षम क्वांटम कंप्यूटर मौजूदा RSA आधारित सुरक्षा प्रणालियों के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं।

क्वांटम कंप्यूटिंग में Shor’s Algorithm कैसे काम करता है?

Shor’s Algorithm में क्वांटम गणना और गणितीय तकनीकों का संयोजन होता है। यह मुख्य रूप से निम्न चरणों पर आधारित है:

  1. समस्या का रूपांतरण: गुणनखंड निकालने की समस्या को एक गणितीय आवर्ती क्रम (Period-Finding Problem) से जोड़ा जाता है।
  2. क्वांटम गणना: क्वांटम सुपरपोजिशन और क्वांटम गेट्स का उपयोग करके संबंधित गणना की जाती है।
  3. Quantum Fourier Transform: इस तकनीक की सहायता से आवर्ती क्रम से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलती है।
  4. गुणनखंड की गणना: प्राप्त परिणामों का शास्त्रीय गणितीय विश्लेषण करके संभावित गुणनखंड निकाले जाते हैं।

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि Shor’s Algorithm की वास्तविक प्रभावशीलता उपलब्ध क्वांटम हार्डवेयर, क्यूबिट की गुणवत्ता और त्रुटि-सुधार की क्षमता पर निर्भर करती है।

Post-Quantum Cryptography क्या है?

क्वांटम कंप्यूटिंग से उत्पन्न संभावित जोखिमों का सामना करने के लिए Post-Quantum Cryptography (PQC) विकसित की जा रही है। इसमें ऐसे क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिथम शामिल हैं जिन्हें ज्ञात क्वांटम हमलों के विरुद्ध सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रीय मानक एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (NIST) ने 2024 में तीन प्रमुख पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी मानक प्रकाशित किए। इनमें ML-KEM, ML-DSA और SLH-DSA शामिल हैं। इनका उद्देश्य क्रमशः सुरक्षित कुंजी स्थापना और डिजिटल हस्ताक्षर जैसी आवश्यकताओं के लिए क्वांटम-प्रतिरोधी विकल्प उपलब्ध कराना है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • एल्गोरिथम: Shor’s Algorithm
  • प्रस्तावित वर्ष: 1994
  • संबंधित वैज्ञानिक: पीटर शोर
  • प्रमुख उपयोग: बड़े पूर्णांकों का अभाज्य गुणनखंड निकालना
  • संभावित रूप से प्रभावित क्रिप्टोग्राफी: RSA और कुछ अन्य पारंपरिक सार्वजनिक-कुंजी प्रणालियाँ
  • संबंधित तकनीक: Quantum Fourier Transform
  • आधुनिक सुरक्षा विकल्प: Post-Quantum Cryptography (PQC)

निष्कर्ष

Shor’s Algorithm क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि भविष्य के शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर कुछ मौजूदा क्रिप्टोग्राफिक प्रणालियों की सुरक्षा को चुनौती दे सकते हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि आज के सभी RSA सिस्टम तुरंत असुरक्षित हो गए हैं। इस एल्गोरिथम को बड़े पैमाने पर प्रभावी ढंग से चलाने के लिए सक्षम और त्रुटि-सुधारित क्वांटम कंप्यूटर की आवश्यकता है। UKPSC, UKSSSC, SSC, रेलवे और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए Shor’s Algorithm, RSA Encryption तथा Post-Quantum Cryptography के बीच संबंध समझना उपयोगी है।

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