UKSSSC TEST 23

UKSSSC / UKPSC टेस्ट 23 – Extreme Hard 30 प्रश्न | GyanLeela
UKSSSC / UKPSC 2026
टेस्ट 23 • Extreme Hard

UKSSSC / UKPSC टेस्ट 23

Extreme Hard • 30 प्रश्न • 17 अक्टूबर 2026

📋 टेस्ट की जानकारी

  • 📌 कुल प्रश्न: 30 प्रश्न (Extreme Hard)
  • ⏱️ कुल समय: 25 मिनट
  • ✅ प्रत्येक सही: 1 अंक
  • ❌ नेगेटिव मार्किंग: -0.25
  • 📝 लंबे प्रश्न: पूरा टेक्स्ट दिखेगा

🎯 आपका परिणाम

0
%
0
सही
0
गलत
कुल अंक: 0/30

🔑 उत्तर कुंजी

GyanLeela.com – UKSSSC / UKPSC टेस्ट 23 (Extreme Hard)

© 2026 GyanLeela • All Rights Reserved

“अकिंचन” का विलोम शब्द: अर्थ, व्युत्पत्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्व

“अकिंचन” का सर्वथा उपयुक्त विलोम शब्द “संपन्न” या “समृद्ध” है।

हिंदी व्याकरण में यह एक ऐसा विलोम युग्म है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर भ्रम उत्पन्न करता है, क्योंकि इसके निकटवर्ती शब्द “धनवान” और “अमीर” को भी विलोम के रूप में स्वीकार किया जाता है — परंतु इनके बीच एक सूक्ष्म अंतर है जिसे समझना आवश्यक है।

“अकिंचन” का अर्थ और व्युत्पत्ति

“अकिंचन” संस्कृत मूल का तत्सम शब्द है। यह “अ” उपसर्ग और “किंचन” के योग से बना है। “किंचन” का अर्थ होता है — कुछ भी, थोड़ा सा, अल्प। जब इसके पहले निषेधात्मक उपसर्ग “अ” लगाया जाता है, तो अर्थ बनता है — “जिसके पास कुछ भी न हो” अर्थात् निर्धन, दरिद्र, जिसके पास कोई संपत्ति या साधन न हो।

यह शब्द केवल आर्थिक दरिद्रता तक सीमित नहीं है। हिंदी साहित्य और भक्ति परंपरा में “अकिंचन” का प्रयोग आत्मिक दरिद्रता या विनम्रता के भाव में भी होता है। जैसे — “मैं अकिंचन हूँ, तुम्हारी शरण में आया हूँ।” यहाँ इसका तात्पर्य है — जिसके पास अपना कुछ भी नहीं, जो पूर्णतः समर्पित हो।

अकिंचन का विलोम: संपन्न क्यों सर्वाधिक उपयुक्त है?

“अकिंचन” का शाब्दिक अर्थ है — जिसके पास कुछ भी नहीं। इसका विलोम वह शब्द होना चाहिए जो “जिसके पास सब कुछ हो” का भाव व्यक्त करे। “संपन्न” का अर्थ है — समृद्ध, जिसके पास पर्याप्त संसाधन हों, संपत्ति से युक्त। यह शब्द केवल धन तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक समृद्धि का द्योतक है — ज्ञान, संसाधन, संपत्ति, वैभव सभी को समाहित करता है।

“धनवान” या “अमीर” का प्रयोग केवल आर्थिक संपत्ति तक सीमित है, जबकि “संपन्न” अधिक व्यापक और औपचारिक शब्द है जो अकिंचन के पूर्ण विपरीत भाव को सटीकता से व्यक्त करता है। इसी प्रकार “समृद्ध” भी श्रेष्ठ विकल्प है।

यहाँ एक और सूक्ष्म भेद ध्यान देने योग्य है — “गरीब” का विलोम “अमीर” माना जाता है, जबकि “निर्धन” का विलोम “धनवान”। परंतु “अकिंचन” का अर्थ “निर्धन” से भी गहरा है — इसका तात्पर्य है “कुछ भी न होना”, अतः इसका विलोम भी उतना ही व्यापक होना चाहिए — “संपन्न”।

प्रतियोगी परीक्षाओं में क्यों पूछा जाता है?

UKPSC, UKSSSC, और अन्य राज्य लोक सेवा आयोगों की हिंदी व्याकरण परीक्षाओं में “अकिंचन” जैसे संस्कृतनिष्ठ शब्द इसलिए पूछे जाते हैं क्योंकि:

  • ये तत्सम शब्द हैं, जिनका अर्थ बिना व्युत्पत्ति जाने स्पष्ट नहीं होता।
  • इनके निकट विलोम (धनवान, अमीर) अभ्यर्थियों को भ्रमित करते हैं और सूक्ष्म भेद परखा जाता है।
  • ये शब्द हिंदी साहित्य, भक्ति काव्य और औपचारिक लेखन में नियमित रूप से प्रयुक्त होते हैं।

अकिंचन और संपन्न का प्रयोग: उदाहरण

अकिंचन के प्रयोग:

  • “वह अकिंचन होकर भी अपने ज्ञान और चरित्र के कारण सबका आदरणीय था।”
  • “भक्त ने कहा — हे प्रभु! मैं अकिंचन हूँ, तुम्हारी कृपा ही मेरा सर्वस्व है।”

संपन्न के प्रयोग:

  • “संपन्न व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह समाज के वंचित वर्ग की सहायता करे।”
  • “यह संपन्न राज्य अपने साधनों के कारण तीव्र गति से विकास कर रहा है।”

निष्कर्ष

अकिंचन का सर्वथा उपयुक्त विलोम “संपन्न” (या “समृद्ध”) है। प्रतियोगी परीक्षा की दृष्टि से यह जोड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तत्सम शब्दों की समझ और निकट विलोमों के सूक्ष्म भेद को परखती है। “धनवान” और “अमीर” केवल आर्थिक अर्थ तक सीमित हैं, जबकि “संपन्न” अकिंचन के व्यापक विपरीत भाव को पूर्णतः व्यक्त करता है। इस सूक्ष्म अंतर को याद रखना परीक्षा में अतिरिक्त अंक दिला सकता है।

error: Content is protected !!
Scroll to Top