UKSSSC / UKPSC टेस्ट 28
📋 टेस्ट की जानकारी
- 📌 कुल प्रश्न: 30 प्रश्न (Extreme Hard)
- ⏱️ कुल समय: 25 मिनट
- ✅ प्रत्येक सही: 1 अंक
- ❌ नेगेटिव मार्किंग: -0.25
- 📝 लंबे प्रश्न: पूरा टेक्स्ट दिखेगा
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🔑 उत्तर कुंजी
“श्वशुर” और “साला” का तत्सम-तद्भव संबंध: अशुद्ध युग्म कौन सा है?
दिए गए युग्मों में अशुद्ध युग्म “श्वशुर – साला” है। “श्वशुर” का तद्भव रूप “साला” नहीं, बल्कि “ससुर” है। “साला” का तत्सम रूप “स्याल” या “स्यालक” होता है। यह सूक्ष्म भेद प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को भ्रमित करता है, क्योंकि दोनों शब्द संबंधी-परिवार के सदस्यों से जुड़े हैं, परंतु उनके तत्सम-तद्भव रूप भिन्न हैं।
तत्सम और तद्भव क्या हैं?
हिंदी व्याकरण में तत्सम वे शब्द हैं जो संस्कृत से बिना किसी परिवर्तन के हिंदी में अपनाए गए — जैसे श्वशुर, मातुल, पितृष्वसा, भ्रातृजा। तद्भव वे शब्द हैं जो संस्कृत से विकृत होकर हिंदी में प्रचलित हुए — जैसे ससुर, मामा, बुआ, भतीजी। तत्सम-तद्भव युग्मों की शुद्धता परखना UKPSC, UKSSSC जैसी परीक्षाओं का स्थायी प्रश्न-क्षेत्र है।
दिए गए युग्मों का विश्लेषण
मातुल – मामा — शुद्ध युग्म। संस्कृत “मातुल” (माँ का भाई) का तद्भव “मामा” है।
पितृष्वसा – बुआ — शुद्ध युग्म। “पितृष्वसा” (पिता की बहन) का तद्भव “बुआ” या “फूफी” है।
भ्रातृजा – भतीजी — शुद्ध युग्म। “भ्रातृजा” (भाई की पुत्री) का तद्भव “भतीजी” है।
श्वशुर – साला — अशुद्ध युग्म। यहाँ दो भिन्न संबंधों के शब्दों को जोड़ दिया गया है। “श्वशुर” का अर्थ है — ससुर (पत्नी या पति का पिता), जिसका तद्भव “ससुर” है। जबकि “साला” का अर्थ है — पत्नी का भाई, जिसका तत्सम रूप “स्याल” या “स्यालक” होता है। अतः यह युग्म तत्सम-तद्भव की दृष्टि से पूर्णतः अशुद्ध है।
सही युग्म क्या होगा?
- श्वशुर → ससुर (पत्नी/पति का पिता)
- स्याल/स्यालक → साला (पत्नी का भाई)
प्रतियोगी परीक्षाओं में क्यों पूछा जाता है?
- ये संस्कृतनिष्ठ तत्सम शब्द हैं, जिनका तद्भव रूप बिना जाने अभ्यर्थी भ्रमित हो जाते हैं।
- संबंधी-परिवार के शब्दों में अनेक निकटवर्ती रूप (ससुर, साला, साली) होते हैं, जिनके तत्सम रूप भिन्न हैं।
- परीक्षा में अशुद्ध युग्म पहचानने का प्रश्न सूक्ष्म ज्ञान परखता है।
निष्कर्ष
“श्वशुर – साला” युग्म अशुद्ध है। श्वशुर का तद्भव “ससुर” है और साला का तत्सम “स्याल/स्यालक”। शेष तीनों युग्म (मातुल-मामा, पितृष्वसा-बुआ, भ्रातृजा-भतीजी) शुद्ध हैं। प्रतियोगी परीक्षा की दृष्टि से यह जोड़ी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तत्सम-तद्भव के सूक्ष्म भेद और संबंधी-शब्दों की सटीक समझ को परखती है।