इजराइल का आयरन डोम, दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही ध्वस्त कर देता है क्या भारत के पास भी है ऐसा सिस्टम? Israel iron dome

इजराइल और फिलिस्तीन के बीच दिन पर दिन तनाव बढ़ता ही जा रहा है। दोनों देशों के बीच हवाई हमले हो रहे हैं। इन हमलों के कारण ही अब तक 70 से भी ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं।

यह भी कहा जा रहा है कि 2014 के बाद ये इजराइल पर यह सबसे बड़ा और भंयकर रॉकेट हमला है। इजराइली मीडिया के अनुसार अब तक एक हजार से भी ज्यादा मिसाइलें उसके देश पर दागी जा चुकी हैं।

इनमें से 90% मिसाइलों को इजराइली डिफेंस सिस्टम ‘आयरन डोम’ ने ही पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। इजराइल इस आयरन डोम की सहायता से खुद को सुरक्षित रखने का दावा करता रहा है।

लेकिन, ये आयरन डोम आखिर है क्या? ये काम कैसे करता है? इसे लगाने में लगभग कितना खर्च आता है? क्या भारत के पास भी है इस प्रकार का कोई अन्य डिफेंस सिस्टम है? आइए जानते हैं…Israel iron dome

इजराइल का आयरन डोम (Iron Dome) क्या है?

इजराइल का आयरन डोम एक एयर डिफेंस सिस्टम (air defense system) है जिसे इजराइली फर्म राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम और इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्री के द्वारा बनाया गया है।

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2006 के इजराइल और लेबनान युद्ध के दौरान हिजबुल्लाह ने इजराइल पर हजारों तरह के रॉकेट दागे थे।इसके बाद इजराइल ने एक नया एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम बनाने की महत्वपूर्ण घोषणा की,

जो उसके लोगों और शहरों की अच्छी तरह से रक्षा करे। इसी के फलस्वरूप इजराइल ने आयरन डोम को डेवलप किया। और 2011 में पहली बार यह सर्विस में आया था ।

इस आयरन डोम को पूरी तरह से बनाने में अमेरिका ने इजराइल को तकनीकी और आर्थिक सहायता प्रदान की है। इस शॉर्ट रेंज ग्राउंड-टू-एयर (short range ground-to-air), एयर डिफेंस सिस्टम में रडार (radar) और तामिर इंटरसेप्टर मिसाइलें (Tamir interceptor missiles) है,

जो किसी भी प्रकार के रॉकेट या मिसाइलों को ट्रैक करके उसे रास्ते में ही पूरी तरह से नष्ट कर देती है। जिस तरह से अभी गाजा से दागे गए कई प्रकार के रॉकेटों को इस सिस्टम ने पूरी तरह से नष्ट किया।मीडियम और लॉन्ग रेंज थ्रेट के लिए दो अलग – अलग सिस्टम काम करते हैं।

इन्हें डेविड्स स्लिंग(David’s Sling) और ऐरो (arrow) कहा जाता है। इससे रॉकेट, आर्टिलरी और मोर्टार के साथ-साथ विमान, हेलिकॉप्टर और मानव रहित हवाई वाहनों का मुकाबला भी किया जा सकता है। Israel iron dome

आयरन डोम (Iron Dome)काम कैसे और किस प्रकार से करता है?

जब दुश्मन कई तरह के रॉकेट दागता है तो आयरन डोम रडार सिस्टम एक्टिव होकर के उसके रास्ते का विश्लेषण (Analysis) करता है। इससे ये यह पता चलता है कि आखिर ये रॉकेट कहां पर गिरने वाला है,क्या ये इजराइल के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है।

अगर ऐसा कुछ भी होता है तो किसी मोबाइल यूनिट या स्टैटिक यूनिट से एक इंटरसेप्टर लॉन्च होता है जो रॉकेट के किसी रिहायशी इलाके या अहम इमारत पर गिरने से पहले ही उसे हवा में ही पूरी तरह से नष्ट कर देता है।

जैसा हाल में हुए इजराइल और फिलिस्तीन संघर्ष के दौरान देखने को मिला था।हालांकि इस डिफेंस सिस्टम की आलोचना करने वाले कुछ एक्सपर्ट ऐसा भी कहते हैं कि आयरन डोम फायदे से ज्यादा अधिक नुकसान पहुंचा सकता है।

हमला रोकने में कितना सफल है आयरन डोम?

आयरन डोम बनाने वाली फर्म राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम और इजराइल सरकार का यह दावा है कि इस सिस्टम का सक्सेस रेट 90% से ज्यादा है।

हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स इजराइल के दावे पर कई तरह के सवाल भी उठाते हैं। उन एक्सपर्ट्स का यह कहना है कि इजराइल ने जो यह दावा किया है वह बिल्कुल भी वास्तविकता के करीब नहीं है।

कनाडा की ब्रॉक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइकल आर्मस्ट्रॉन्ग ने 2019 में अमेरिकी मैगजीन नेशनल इंटरेस्ट में यह लिखा था कि कोई भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम पूरी तरह से रिलायबल नहीं हो सकता है।

प्रोफेसर आर्मस्ट्रॉन्ग अलग-अलग डिफेंस सिस्टम की इफेक्टिवनेस पर स्टडी कर रहे हैं। दुनिया के कई एक्सपर्ट इस सिस्टम का सक्सेस रेट 80% के करीब ही मानते हैं।

हालांकि मौजूदा संघर्ष के दौरान भी इजराइली सेना की ओर से यह भी कहा गया है कि गाजा की ओर से दागे गए एक हजार से ज्यादा रॉकेट में से 90% को आयरन डोम ने हवा में ही पूरी तरह से नष्ट कर दिया।

इस सिस्टम को लगाने में लगभग कितना खर्च आता है?

इस सिस्टम के यूनिट (Unit) की कीमत 50 मिलियन डॉलर (करीब 368 करोड़ रुपए) होती है। वहीं, एक इंटरसेप्टर तामिर मिसाइल (interceptor tamir missile) की कीमत करीब 80 हजार डॉलर (59 लाख रुपए) तक होती है।

वहीं, एक रॉकेट 1 हजार डॉलर (करीब 74 हजार रुपए) से भी कम तक का होता है। इस सिस्टम रॉकेट को अवरोधन (Intercept) करने के लिए दो तामिर मिसाइलें (tamir missiles) लगी होती हैं।

एक्सपर्ट्स तो इसे कम ही खर्चीला मानते हैं क्योंकि ये तभी चलाया जा सकता है जब किसी रॉकेट से इंसान की जिंदगी या किसी अहम आधारिक संरचना (infrastructure) को खतरा होता है। Israel iron dome

इस वजह से कम इंटरसेप्टर की जरूरत पड़ती है। हालांकि इजराइल में ही सरकार के आलोचकों का यह कहना है कि सरकार इस सिस्टम पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गई है। उसे दूसरे डिफेंस सिस्टम पर भी काम करने की बहुत जरूरत है।

तो क्या गाजा से दागे जाने वाले सभी रॉकेट से इजराइल को कोई भी फर्क नहीं पड़ा?

इजराइल पिछले एक दशक से हमेशा आयरन डोम का इस्तेमाल करता रहा है। इसके बाद भी तनाव उत्पन्न होने पर फिलिस्तीनी समूहों की ओर से लगातार रॉकेट दागे जाते हैं। आयरन डोम के अधिक प्रभावी होने के बाद भी कुछ रॉकेट रिहायशी इलाकों में गिरते हैं।

इससे काफी हद तक नुकसान होता है। हमास और इस्लामिक जेहादियों पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स का यह मानना है जैसा कि हमास और उसके सहयोगियों के पास दस हजार रॉकेट हो सकते हैं।

अमेरिकी एक्सपर्ट यह दावा करते हैं कि हमास को शुरुआत में ये रॉकेट मिस्र सीमा से तस्करी करके ईरान से मिले थे। हालांकि अब फिलिस्तीनी एक्सपर्ट इसे खुद बना रहे हैं।

हमास ने 2001 के आसपास ही कस्सम नाम का रॉकेट बनाना शुरू किया। शुरुआत में इसकी रेंज एक से दो मील की थी। नए वर्जन कस्सम 3 में इस रेंज को बढ़ाकर 10 मील कर दिया गया है।

हालांकि इस बार के संघर्ष में ऐसे रॉकेट का भी इस्तेमाल हुआ जिनकी रेंज 40 मील तक है। इजराइली सेना का यह भी कहना है कि 2019 में संघर्ष के दौरान हमास ने 75 मील (75 miles) तक की रेंज के रॉकेट का इस्तेमाल किया था।

इजराइली सेना के रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल माइकल हेरजोग ने 2019 में दि वाशिंगटन पोस्ट से यह कहा था कि 2.5 मील से ज्यादा रेंज (Range) के रॉकेट पर आयरन डोम बहुत अधिक कारगर नहीं होता।

तनाव और बढ़ते हुए नए – नए खतरों को देखते हुए बुधवार को इजराइली सेना ने गाजा बॉर्डर के आसपास के रहने वाले लोगों को घर से बिल्कुल बाहर नहीं निकलने को कहा है।

इस तरह का कोई भी सिस्टम क्या भारत के पास भी मौजूद है?

अमेरिका, रूस के साथ ही इजराइल भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम ( missile defense system) का मास्टर है। चारों ओर से दुश्मनों से घिरे हुए इजराइल ने पिछले कई सालों से अमेरिका की मदद से अपने डिफेंस सिस्टम को बहुत अधिक मजबूत कर लिया है।

जहां तक अगर भारत की बात है तो भारत रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीद रहा है। ये प्रक्रिया (process) अभी चल ही रही है। S-400 भी रॉकेट, मिसाइल और क्रूज मिसाइलों (cruise missiles) के हमले से बचाता है।

इसकी रेंज आयरन डोम से बहुत ज्यादा है। भारत इजराइल की तुलना में क्षेत्रफल के लिहाज से एक काफी बड़ा देश है, लिहाजा ऐसे सिस्टम भारत के लिए बहुत ज्यादा जरूरी हैं।