THE UNTOLD STORY अधूरी दस्तक

रात के करीब 2 बजे थे। आसमान में बादल छाए हुए थे और हल्की-हल्की बारिश शुरू हो चुकी थी। गाँव के किनारे बने उस पुराने मकान में राधा अकेली रहती थी। THE UNTOLD STORY

उस घर को लोग “सूना घर” कहते थे।

कहते हैं, सालों पहले यहाँ एक परिवार रहता था—माँ, पिता और उनकी छोटी बेटी। एक रात अचानक तीनों गायब हो गए। बस दीवारों पर खरोंच के निशान और एक टूटी गुड़िया मिली थी।

राधा ने इन बातों को हमेशा अफवाह समझा।

लेकिन उस रात…

तेज हवा के साथ खिड़कियाँ अपने आप हिलने लगीं। कमरे में रखी पुरानी घड़ी अचानक रुक गई—ठीक 2:00 बजे पर।

और तभी—

ठक… ठक… ठक…

दरवाज़े पर दस्तक हुई।

राधा घबरा गई। इतनी रात को कौन हो सकता है?

उसने धीरे से पूछा,
“कौन है…?”

कुछ पल सन्नाटा रहा।

फिर दरवाज़े के दूसरी तरफ से एक छोटी बच्ची की आवाज़ आई—
“दीदी… दरवाज़ा खोलो… मुझे डर लग रहा है…”

राधा का दिल पसीज गया। उसने सोचा शायद कोई बच्ची रास्ता भटक गई है। THE UNTOLD STORY

लेकिन जैसे ही वह दरवाज़े के पास पहुँची, उसे अचानक याद आया—
इस घर की कहानी में भी एक छोटी बच्ची थी…

उसका हाथ दरवाज़े के हैंडल पर रुक गया।

बाहर से फिर आवाज़ आई—
“दीदी… जल्दी खोलो… वो आ रही है…”

अब राधा के मन में डर और बढ़ गया।

उसने हिम्मत करके दरवाज़ा थोड़ा सा खोला…

बाहर कोई नहीं था।

बस जमीन पर एक पुरानी, गंदी गुड़िया पड़ी थी—जिसकी एक आँख गायब थी।

अचानक—

धड़ाम!

दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।

राधा चीख उठी।

कमरे की लाइट टिमटिमाने लगी। हवा और ठंडी हो गई।

तभी पीछे से एक धीमी हँसी सुनाई दी—

“तुमने… दरवाज़ा खोल ही दिया…”

राधा ने कांपते हुए पीछे मुड़कर देखा।

कोने में वही औरत खड़ी थी—सफेद साड़ी, बिखरे बाल, और काली आँखें।

उसकी मुस्कान डरावनी थी। THE UNTOLD STORY

“हम बहुत समय से… किसी का इंतज़ार कर रहे थे…”

तभी दीवारों पर खरोंच के निशान उभरने लगे… जैसे कोई अदृश्य हाथ उन्हें बना रहा हो।

फर्श पर पानी फैलने लगा—लेकिन वो पानी नहीं… खून जैसा लग रहा था।

और अचानक—
वो गुड़िया अपने आप हिलने लगी।

राधा डर के मारे जमीन पर गिर गई।

और तभी—एक छोटी बच्ची की आत्मा उसके सामने प्रकट हुई।

लेकिन… वो डरावनी नहीं थी।

उसकी आँखों में आँसू थे।

“दीदी… भागो… ये मेरी माँ है… ये सबको यहीं रोक लेती है…”

राधा ने डरते हुए पूछा,
“तुम… तुम कौन हो?”

बच्ची बोली—
“मैं वही हूँ… जो कभी यहाँ रहती थी…”

तभी वो औरत गुस्से में चिल्लाई—
“चुप रहो!!!”

कमरा जोर-जोर से हिलने लगा।

बच्ची ने राधा का हाथ पकड़ा—
“अगर बचना है तो मेरी बात मानो… दरवाज़ा मत खोलना… और पीछे मत देखना…”

राधा उठी और भागने लगी।

दरवाज़ा अपने आप खुल गया—लेकिन इस बार बाहर घना अंधेरा था।

पीछे से उस औरत की आवाज़ गूँज रही थी—
“मत जाओ… तुम अब हमारी हो…”

राधा भागती रही… बिना पीछे देखे…

अचानक वो बाहर आ गई।

बारिश तेज हो चुकी थी।

जब उसने हिम्मत करके पीछे देखा—

वो घर… वहाँ था ही नहीं।

बस खाली ज़मीन थी।

राधा हाँफते हुए गिर पड़ी।

सुबह गाँव वाले उसे उसी जगह पर बेहोश पाए।

जब उसने सब बताया, तो गाँव के एक बूढ़े आदमी ने कहा—

“तुम बहुत किस्मत वाली हो… बहुत कम लोग वहाँ से वापस आते हैं…”

राधा ने पूछा,
“वो बच्ची…?”

बूढ़ा आदमी चुप हो गया… फिर बोला—

“कहते हैं… वो अपनी माँ से आज भी लोगों को बचाने की कोशिश करती है…”

राधा ने आखिरी बार उस जगह की तरफ देखा…

उसे लगा जैसे दूर से कोई छोटी बच्ची मुस्कुरा रही है…
इस बार… डरावनी नहीं… बल्कि आभारीTHE UNTOLD STORY


अंत (सीख)

कुछ दरवाज़े… कभी नहीं खोलने चाहिए।
लेकिन कभी-कभी… किसी की मासूम आत्मा आपको बचाने भी आ जाती है।


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