UKSSSC TEST 11

UKSSSC / UKPSC टेस्ट 11 – Extreme Hard 30 प्रश्न | GyanLeela
UKSSSC / UKPSC 2026
टेस्ट 11 • Extreme Hard

UKSSSC / UKPSC टेस्ट 11

Extreme Hard • 30 प्रश्न • लंबे प्रश्न पूर्ण दिखेंगे

📋 टेस्ट की जानकारी

  • 📌 कुल प्रश्न: 30 प्रश्न (Extreme Hard)
  • ⏱️ कुल समय: 20 मिनट
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  • 📝 लंबे प्रश्न: पूरा टेक्स्ट दिखेगा

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खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य कौन-सा है? जानिए प्रियप्रवास के बारे में पूरी जानकारी

खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य कौन-सा है? हिंदी साहित्य और प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। इसका सही उत्तर ‘प्रियप्रवास’ है। ‘प्रियप्रवास’ के रचयिता अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ हैं। यह कृति हिंदी साहित्य में खड़ी बोली के काव्य-विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य कौन-सा है?

प्रश्न: हिंदी साहित्य में खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य किसे माना जाता है?

(A) कामायनी
(B) साकेत
(C) प्रियप्रवास
(D) रामचरितमानस

सही उत्तर: (C) प्रियप्रवास

‘प्रियप्रवास’ की रचना अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ ने की थी।

प्रतियोगी परीक्षाओं में इसे खड़ी बोली के प्रारंभिक महत्वपूर्ण महाकाव्यों में गिना जाता है।

प्रियप्रवास के रचयिता कौन हैं?

प्रियप्रवास के रचयिता अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ हैं।

वे हिंदी साहित्य के प्रमुख कवियों में माने जाते हैं। उनका साहित्यिक योगदान विशेष रूप से खड़ी बोली हिंदी के काव्य-विकास से जुड़ा हुआ है।

‘हरिऔध’ का पूरा नाम अयोध्यासिंह उपाध्याय था। उनकी रचनाओं में संस्कृतनिष्ठ भाषा और काव्यात्मक अभिव्यक्ति की विशेषता दिखाई देती है।

प्रियप्रवास किस प्रकार की कृति है?

‘प्रियप्रवास’ को कृष्ण-कथा पर आधारित काव्य-कृति के रूप में जाना जाता है। इसमें श्रीकृष्ण के मथुरा प्रस्थान के बाद ब्रज में उत्पन्न विरह और भावनात्मक स्थिति को काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है।

इस कारण इसे विरह-काव्य के रूप में भी जाना जाता है। राधा और ब्रजवासियों के विरह भाव को कृति में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

प्रियप्रवास का हिंदी साहित्य में महत्व

हिंदी साहित्य के इतिहास में ‘प्रियप्रवास’ का विशेष महत्व है। खड़ी बोली को काव्य की प्रभावशाली भाषा के रूप में स्थापित करने की प्रक्रिया में इस कृति का उल्लेख महत्वपूर्ण रूप से किया जाता है।

बाद के दौर में जयशंकर प्रसाद की ‘कामायनी’, मैथिलीशरण गुप्त की ‘साकेत’ जैसी कृतियों ने खड़ी बोली काव्य को और समृद्ध किया।

इसलिए परीक्षा में इन कृतियों के रचनाकारों और साहित्यिक विशेषताओं के बीच अंतर याद रखना उपयोगी है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • कृति: प्रियप्रवास
  • रचनाकार: अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
  • साहित्यिक भाषा: खड़ी बोली हिंदी
  • कथावस्तु: कृष्ण-कथा एवं ब्रज का विरह
  • महत्व: खड़ी बोली के प्रारंभिक महत्वपूर्ण महाकाव्यों में स्थान

प्रतियोगी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न: हिंदी साहित्य में खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य किसे माना जाता है?

उत्तर: प्रियप्रवास

रचनाकार: अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

याद रखने की ट्रिक

“हरिऔध → प्रियप्रवास → खड़ी बोली”

इस छोटी-सी ट्रिक से परीक्षा में प्रश्न को आसानी से याद किया जा सकता है।

प्रियप्रवास और अन्य प्रसिद्ध कृतियां

कृतिरचनाकार
प्रियप्रवासअयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
कामायनीजयशंकर प्रसाद
साकेतमैथिलीशरण गुप्त
रामचरितमानसगोस्वामी तुलसीदास

यह तालिका हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण कृति–रचनाकार संबंधों को याद करने में मदद कर सकती है।

निष्कर्ष

‘प्रियप्रवास’ को हिंदी साहित्य में खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य माना जाता है और इसके रचयिता अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ हैं। यह कृति कृष्ण-कथा, ब्रज-विरह और खड़ी बोली के काव्यात्मक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

Exam Trick:
👉 प्रियप्रवास — हरिऔध — खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य

यह प्रश्न UKPSC, UKSSSC, UPSC, SSC, शिक्षक भर्ती, PCS तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की हिंदी साहित्य तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है।

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