UKSSSC कनिष्ठ सहायक टेस्ट 6
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28 सितंबर को किस महान स्वतंत्रता सेनानी की जयंती मनाई जाती है? जानिए शहीद भगत सिंह का जीवन, आंदोलन और महत्वपूर्ण तथ्य
परिचय
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में शहीद भगत सिंह का नाम साहस, क्रांतिकारी विचारों और देशभक्ति के प्रतीक के रूप में लिया जाता है। 28 सितंबर को शहीद भगत सिंह की जयंती मनाई जाती है। भारत सरकार के अमृत महोत्सव से संबंधित आधिकारिक सामग्री में भी भगत सिंह की जन्मतिथि 28 सितंबर 1907 दर्ज की गई है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में भगत सिंह से जुड़े प्रश्न इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन, सामान्य ज्ञान और राष्ट्रीय आंदोलन जैसे विषयों में बार-बार पूछे जाते हैं। इसलिए UPSC, SSC, रेलवे, पुलिस, UKPSC, UKSSSC, PCS, CTET, TET और अन्य सरकारी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को याद रखना उपयोगी है।
इसी आधार पर आज के प्रश्न में पूछा गया है—
प्रश्न: 28 सितंबर को भारत के किस महान स्वतंत्रता सेनानी की जयंती मनाई जाती है?
उत्तर: शहीद भगत सिंह।
28 सितंबर को किसकी जयंती मनाई जाती है?
28 सितंबर को शहीद भगत सिंह की जयंती मनाई जाती है।
प्रधानमंत्री कार्यालय और प्रेस सूचना ब्यूरो की आधिकारिक सामग्री में भी 28 सितंबर को भगत सिंह की जन्म-जयंती के रूप में उल्लेखित किया गया है।
भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को तत्कालीन पंजाब के लायलपुर जिले के बंगा गांव में हुआ था, जो वर्तमान में पाकिस्तान में है। भारत सरकार की अमृत महोत्सव सामग्री में भी उनकी जन्मतिथि 28 सितंबर 1907 दी गई है।
उनका परिवार भी स्वतंत्रता आंदोलन की गतिविधियों से जुड़ा हुआ था। उनके पिता सरदार किशन सिंह और चाचा अजीत सिंह स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित गतिविधियों में सक्रिय थे।
शहीद भगत सिंह का जीवन परिचय
| तथ्य | जानकारी |
|---|---|
| नाम | भगत सिंह |
| प्रसिद्ध नाम | शहीद-ए-आजम भगत सिंह |
| जन्म | 28 सितंबर 1907 |
| जन्म स्थान | बंगा, लायलपुर जिला, पंजाब (अब पाकिस्तान) |
| पिता | सरदार किशन सिंह |
| माता | विद्यावती |
| प्रमुख संगठन | नौजवान भारत सभा, HSRA |
| प्रमुख गतिविधि | क्रांतिकारी स्वतंत्रता आंदोलन |
| केंद्रीय विधानसभा बम कांड | 1929 |
| मृत्यु | 23 मार्च 1931 |
| मृत्यु स्थान | लाहौर सेंट्रल जेल |
| आयु | लगभग 23 वर्ष |
भारत सरकार की सामग्री के अनुसार भगत सिंह नौजवान भारत सभा तथा हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) से जुड़े थे।
भगत सिंह को “शहीद-ए-आजम” क्यों कहा जाता है?
भगत सिंह ने बहुत कम उम्र में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने स्वतंत्रता को केवल राजनीतिक सत्ता परिवर्तन के रूप में नहीं देखा, बल्कि सामाजिक न्याय और शोषण से मुक्ति से भी जोड़ा।
उनके विचारों और लेखन में सामाजिक समानता, स्वतंत्रता और शोषण-विरोधी विचार स्पष्ट दिखाई देते हैं। सरकारी सामग्री में भी उन्हें एक क्रांतिकारी के साथ-साथ गंभीर विचारक और बौद्धिक व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
उनकी कम उम्र में हुई शहादत ने उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रसिद्ध क्रांतिकारी चेहरों में शामिल कर दिया।
“इंकलाब जिंदाबाद” का भगत सिंह से क्या संबंध है?
“इंकलाब जिंदाबाद” भगत सिंह से सबसे अधिक जुड़ा हुआ नारा है और उन्होंने इसे स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान व्यापक रूप से लोकप्रिय बनाया।
हालांकि परीक्षा की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना चाहिए। “इंकलाब जिंदाबाद” नारे के मूल प्रयोग का श्रेय हसरत मोहानी को दिया जाता है, जबकि भगत सिंह और उनके साथियों ने इसे बेहद लोकप्रिय बनाया।
सरकारी स्रोतों में भी भगत सिंह के साथ “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे का विशेष रूप से उल्लेख मिलता है।
इसलिए यदि प्रतियोगी परीक्षा में पूछा जाए—
“इंकलाब जिंदाबाद” नारे को लोकप्रिय बनाने वाले क्रांतिकारी कौन थे?
तो भगत सिंह से संबंधित उत्तर परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
भगत सिंह और लाला लाजपत राय
1928 में साइमन कमीशन के विरोध के दौरान हुए प्रदर्शन में लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनका निधन हो गया।
इस घटना ने भगत सिंह और उनके साथियों को गहराई से प्रभावित किया। इसके बाद ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे.पी. सॉन्डर्स की हत्या की घटना में भगत सिंह और उनके साथियों की भूमिका सामने आई। भारत सरकार की अमृत महोत्सव सामग्री में भी सॉन्डर्स की हत्या और लाला लाजपत राय की घटना के बीच संबंध का उल्लेख मिलता है।
1929 का केंद्रीय विधानसभा बम कांड
भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 1929 में दिल्ली की केंद्रीय विधान सभा में बम फेंका।
इस घटना का उद्देश्य बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या करना नहीं था, बल्कि ब्रिटिश सरकार और जनता तक अपना राजनीतिक संदेश पहुंचाना था। सरकारी सामग्री में इस घटना के उद्देश्य को ऐसी कार्रवाई के रूप में बताया गया है जिसका मकसद “बहरों को सुनाना” था।
बम फेंकने के बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने भागने के बजाय गिरफ्तारी दी।
यही घटना आगे चलकर भगत सिंह के मुकदमे और उनके क्रांतिकारी विचारों के व्यापक प्रचार का महत्वपूर्ण माध्यम बनी।
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर का नाम एक साथ लिया जाता है।
तीनों को ब्रिटिश सरकार ने लाहौर षड्यंत्र मामले में मृत्युदंड दिया। 23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई। भारत सरकार की आधिकारिक सामग्री में भी उनकी मृत्यु की तारीख 23 मार्च 1931 दर्ज है।
इसी कारण 23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में भी याद किया जाता है।
भगत सिंह की शहादत का महत्व
भगत सिंह की शहादत ने भारतीय युवाओं पर गहरा प्रभाव डाला। उनकी निर्भीकता, अध्ययनशीलता और स्वतंत्रता के प्रति समर्पण ने उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनाया।
भारत सरकार की आधिकारिक सामग्री में भगत सिंह को स्वतंत्रता आंदोलन के ऐसे व्यक्तित्व के रूप में याद किया गया है जिनका साहस और बलिदान आज भी युवाओं को प्रेरित करता है।
उनकी लोकप्रियता केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। पंजाब, हरियाणा, उत्तर भारत और देश के अन्य हिस्सों में उनके नाम से अनेक संस्थान, स्मारक और कार्यक्रम जुड़े हुए हैं।
भगत सिंह से जुड़े महत्वपूर्ण संगठन
1. नौजवान भारत सभा
भगत सिंह ने युवाओं को संगठित करने के लिए नौजवान भारत सभा की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसका उद्देश्य युवाओं में राजनीतिक जागरूकता और स्वतंत्रता की भावना को मजबूत करना था।
2. हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन
भगत सिंह का संबंध हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) से भी था। यह संगठन ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था।
प्रतियोगी परीक्षाओं में इन दोनों संगठनों से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
भगत सिंह की जयंती क्यों महत्वपूर्ण है?
28 सितंबर को भगत सिंह की जयंती केवल एक ऐतिहासिक तिथि याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को समझने का भी अवसर है।
इस दिन उनके जीवन, विचारों, स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान और शहादत को याद किया जाता है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी विभिन्न वर्षों में 28 सितंबर को उनकी जन्म-जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में इस दिन से जुड़े प्रश्न विशेष रूप से करंट अफेयर्स + इतिहास के मिश्रित रूप में भी पूछे जा सकते हैं।
परीक्षा के लिए भगत सिंह से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
1. भगत सिंह का जन्म कब हुआ था?
28 सितंबर 1907।
2. भगत सिंह का जन्म कहां हुआ था?
बंगा गांव, लायलपुर जिला, तत्कालीन पंजाब।
3. वर्तमान में बंगा किस देश में है?
पाकिस्तान।
4. भगत सिंह की मृत्यु कब हुई?
23 मार्च 1931।
5. भगत सिंह के साथ किन दो क्रांतिकारियों को फांसी दी गई?
राजगुरु और सुखदेव।
6. भगत सिंह किस संगठन से जुड़े थे?
नौजवान भारत सभा और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन।
7. केंद्रीय विधानसभा बम कांड कब हुआ था?
1929।
8. भगत सिंह के साथ केंद्रीय विधानसभा में बम फेंकने वाले क्रांतिकारी कौन थे?
बटुकेश्वर दत्त।
9. भगत सिंह की शहादत से जुड़ा प्रमुख नारा कौन सा है?
इंकलाब जिंदाबाद।
10. भगत सिंह की जयंती कब मनाई जाती है?
28 सितंबर।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण MCQs
प्रश्न 1. शहीद भगत सिंह की जयंती कब मनाई जाती है?
(A) 23 मार्च
(B) 15 अगस्त
(C) 28 सितंबर
(D) 26 जनवरी
उत्तर: (C) 28 सितंबर
प्रश्न 2. भगत सिंह का जन्म किस वर्ष हुआ था?
(A) 1905
(B) 1907
(C) 1909
(D) 1911
उत्तर: (B) 1907
प्रश्न 3. भगत सिंह का जन्मस्थान कौन सा था?
(A) अमृतसर
(B) लाहौर
(C) बंगा
(D) दिल्ली
उत्तर: (C) बंगा
प्रश्न 4. भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को कब फांसी दी गई?
(A) 26 जनवरी 1930
(B) 23 मार्च 1931
(C) 15 अगस्त 1931
(D) 28 सितंबर 1931
उत्तर: (B) 23 मार्च 1931
प्रश्न 5. 1929 के केंद्रीय विधानसभा बम कांड में भगत सिंह के साथ कौन थे?
(A) चंद्रशेखर आजाद
(B) राम प्रसाद बिस्मिल
(C) बटुकेश्वर दत्त
(D) अशफाक उल्ला खान
उत्तर: (C) बटुकेश्वर दत्त
प्रश्न 6. भगत सिंह किस संगठन से संबंधित थे?
(A) आजाद हिंद फौज
(B) नौजवान भारत सभा
(C) मुस्लिम लीग
(D) होम रूल लीग
उत्तर: (B) नौजवान भारत सभा
प्रश्न 7. “इंकलाब जिंदाबाद” नारा भगत सिंह के साथ क्यों प्रसिद्ध हुआ?
(A) उन्होंने इसे स्वतंत्रता आंदोलन में व्यापक रूप से लोकप्रिय बनाया
(B) यह उनका जन्मस्थान था
(C) यह उनकी पुस्तक का नाम था
(D) यह कांग्रेस का आधिकारिक नारा था
उत्तर: (A) उन्होंने इसे स्वतंत्रता आंदोलन में व्यापक रूप से लोकप्रिय बनाया
एक नजर में याद करें
28 सितंबर → भगत सिंह जयंती
1907 → भगत सिंह का जन्म
बंगा → जन्मस्थान
1926 → नौजवान भारत सभा से संबंध
1928 → लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद क्रांतिकारी गतिविधियां तेज
1929 → केंद्रीय विधानसभा बम कांड
बटुकेश्वर दत्त → विधानसभा बम कांड में साथी
23 मार्च 1931 → भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत
इंकलाब जिंदाबाद → भगत सिंह से व्यापक रूप से जुड़ा नारा
निष्कर्ष
28 सितंबर को शहीद भगत सिंह की जयंती मनाई जाती है। उनका जीवन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने कम उम्र में ही ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया और अपने विचारों तथा बलिदान से देश के युवाओं को गहराई से प्रभावित किया।
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से उनकी जन्मतिथि, जन्मस्थान, नौजवान भारत सभा, HSRA, केंद्रीय विधानसभा बम कांड, बटुकेश्वर दत्त, राजगुरु-सुखदेव, 23 मार्च 1931 और इंकलाब जिंदाबाद जैसे तथ्य विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए यदि प्रश्न पूछा जाए कि “28 सितंबर को किस महान स्वतंत्रता सेनानी की जयंती मनाई जाती है?”, तो इसका सही उत्तर होगा—