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BNS 2023 की धारा 152 क्या है? | IPC की धारा 124A (राजद्रोह) की जगह नया देशद्रोह कानून
भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 लागू होने के बाद सबसे अधिक चर्चा जिस कानूनी बदलाव की हुई, वह IPC की धारा 124A (राजद्रोह/Sedition) को हटाकर BNS की धारा 152 को लागू करना था।
प्रतियोगी परीक्षाओं, कानून की पढ़ाई और सामान्य ज्ञान में यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस लेख में जानिए कि BNS की धारा 152 क्या है, IPC की धारा 124A से इसका अंतर क्या है, इसमें क्या सजा है और परीक्षा में इससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य कौन-से हैं।
BNS की धारा 152 क्या है?
भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 152 उन कृत्यों से संबंधित है जो भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालते हैं।
इस प्रावधान का उद्देश्य केवल सरकार की आलोचना को अपराध बनाना नहीं है, बल्कि ऐसे कार्यों पर कार्रवाई करना है जो देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए वास्तविक खतरा पैदा करें।
IPC की धारा 124A और BNS की धारा 152 में अंतर
| IPC धारा 124A | BNS धारा 152 |
|---|---|
| राजद्रोह (Sedition) से संबंधित | भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित |
| औपनिवेशिक कानून माना जाता था | नए आपराधिक कानून का हिस्सा |
| सरकार के प्रति घृणा या असंतोष जैसे शब्दों पर विवाद रहा | फोकस देश की सुरक्षा और अखंडता पर है |
BNS धारा 152 कब लागू हुई?
भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 1 जुलाई 2024 से पूरे देश में लागू हुए। इसी दिन से धारा 152 भी प्रभावी हुई।
धारा 152 के तहत सजा
यदि कोई व्यक्ति ऐसा कार्य करता है जिससे भारत की संप्रभुता, एकता या अखंडता को गंभीर खतरा पहुँचता है, तो उसके विरुद्ध धारा 152 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इस अपराध के लिए आजीवन कारावास या अन्य निर्धारित कठोर कारावास तथा जुर्माने का प्रावधान है।
क्या सरकार की आलोचना करना अपराध है?
सामान्य लोकतांत्रिक आलोचना, सरकारी नीतियों पर असहमति या शांतिपूर्ण विरोध अपने आप में धारा 152 के अंतर्गत अपराध नहीं बन जाते।
किसी विशेष मामले में अपराध बनता है या नहीं, यह उसके तथ्यों, लागू कानून और न्यायालय की व्याख्या पर निर्भर करता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- BNS की धारा 152 किससे संबंधित है? → भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता के विरुद्ध कृत्य।
- IPC की कौन-सी धारा हटाई गई? → धारा 124A (राजद्रोह)।
- BNS कब लागू हुआ? → 1 जुलाई 2024।
- BNS का पूरा नाम क्या है? → भारतीय न्याय संहिता, 2023।
One Liner Revision
- BNS धारा 152 = देश की संप्रभुता और अखंडता से संबंधित अपराध।
- IPC 124A = पुरानी राजद्रोह धारा।
- नया आपराधिक कानून लागू = 1 जुलाई 2024।
- Law, Judiciary, UPSC, SSC, Police और PCS परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण।
FAQs
BNS की धारा 152 किससे संबंधित है?
यह धारा भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित है।
IPC की धारा 124A किस नाम से जानी जाती थी?
IPC की धारा 124A को राजद्रोह (Sedition) की धारा कहा जाता था।
BNS कब लागू हुआ?
भारतीय न्याय संहिता 1 जुलाई 2024 से लागू हुई।
क्या BNS 152 प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है?
हाँ। UPSC, SSC, Judiciary, PCS, Police, Law Entrance और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इससे प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
निष्कर्ष
भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 152 भारत के नए आपराधिक कानून का महत्वपूर्ण प्रावधान है। इसने IPC की पुरानी धारा 124A का स्थान लिया है और अब ध्यान सरकार की आलोचना के बजाय भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा पर केंद्रित किया गया है। इसलिए कानून के विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं और प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थियों के लिए इस धारा की सही समझ आवश्यक है।