Uttarakhand Test 123- 2026 Free Mock Test

Uttarakhand Test 123 – UKSSSC & UKPSC 2026 Extreme Hard Mock Test | GyanLeela
UKPSC • UKSSSC • Extreme Hard
Test 123 • 30 प्रश्न

📈 उत्तराखंड टेस्ट 123

21 August 2026 • विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस विशेष • Extreme Hard

📋 टेस्ट की जानकारी

  • 📌 कुल प्रश्न: 30 प्रश्न
  • ⏱️ कुल समय: 20 मिनट
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नंदा देवी राजजात यात्रा: कब और कहाँ से शुरू होती है? जानिए पूरी जानकारी

उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में नंदा देवी राजजात यात्रा का विशेष महत्व है। इसे उत्तराखंड की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक यात्राओं में गिना जाता है। हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच आयोजित होने वाली यह यात्रा अपनी प्राचीन परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।

नंदा देवी राजजात यात्रा कहाँ से शुरू होती है?

नंदा देवी राजजात यात्रा का पारंपरिक प्रारंभिक स्थल चमोली जिले का नौटी गांव माना जाता है।

नौटी गांव का संबंध नंदा देवी की पूजा परंपरा से लंबे समय से रहा है। यहां से शुरू होकर यात्रा हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों से गुजरती हुई अपने धार्मिक गंतव्य की ओर आगे बढ़ती है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • यात्रा: नंदा देवी राजजात
  • प्रारंभिक स्थल: नौटी गांव
  • जिला: चमोली
  • राज्य: उत्तराखंड
  • प्रमुख धार्मिक देवी: नंदा देवी
  • प्रमुख प्रतीक: चौसिंगा खाड़ू यानी चार सींग वाला मेढ़ा
  • आयोजन: सामान्यतः 12 वर्ष के अंतराल पर

नंदा देवी राजजात को ‘हिमालय का महाकुंभ’ क्यों कहा जाता है?

नंदा देवी राजजात केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की लोक संस्कृति, धार्मिक आस्था और हिमालयी परंपराओं का अद्भुत संगम है।

यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। कठिन पहाड़ी रास्तों, ऊंचाई वाले क्षेत्रों और बदलते मौसम के बावजूद श्रद्धालु धार्मिक आस्था के साथ यात्रा पूरी करते हैं। इसी व्यापक धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण इसे कई बार ‘हिमालय का महाकुंभ’ कहा जाता है।

चौसिंगा खाड़ू का क्या महत्व है?

नंदा देवी राजजात यात्रा में चौसिंगा खाड़ू यानी चार सींग वाला मेढ़ा विशेष आकर्षण और धार्मिक प्रतीक माना जाता है।

लोक परंपरा में इसे देवी नंदा को उनके मायके से ससुराल की ओर विदा करने से जुड़ी परंपरा का हिस्सा माना जाता है। इसलिए यात्रा में चौसिंगा खाड़ू का विशेष धार्मिक महत्व है।

नंदा देवी राजजात कितने वर्ष में होती है?

नंदा देवी राजजात यात्रा लगभग 12 वर्ष के अंतराल पर आयोजित होने वाली प्रसिद्ध यात्रा है। यही कारण है कि इस यात्रा का आयोजन सामान्य वार्षिक धार्मिक मेलों की तुलना में विशेष माना जाता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तराखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं में राज्य की संस्कृति, धार्मिक यात्राओं, मंदिरों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक स्थलों से प्रश्न पूछे जाते हैं।

विशेष रूप से निम्न तथ्य याद रखें:

नंदा देवी राजजात → नौटी → चमोली → 12 वर्ष → चौसिंगा खाड़ू

परीक्षा प्रश्न

प्रश्न: नंदा देवी राजजात यात्रा का पारंपरिक प्रारंभिक स्थल कौन-सा है?

(A) जोशीमठ
(B) नौटी
(C) वाण
(D) गोपेश्वर

सही उत्तर: (B) नौटी

व्याख्या: नंदा देवी राजजात यात्रा का पारंपरिक प्रारंभिक स्थल नौटी गांव, चमोली माना जाता है। यह यात्रा उत्तराखंड की महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल है।

निष्कर्ष

नंदा देवी राजजात यात्रा उत्तराखंड की धार्मिक आस्था और हिमालयी संस्कृति का महत्वपूर्ण प्रतीक है। परीक्षा की दृष्टि से इसके प्रारंभिक स्थल नौटी, चमोली जिला, 12 वर्ष के अंतराल और चौसिंगा खाड़ू जैसे तथ्यों को अवश्य याद रखना चाहिए।

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