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Sita Soren vs Union of India 2024: सांसद और विधायक रिश्वत लेने पर संसदीय विशेषाधिकार का दावा कर सकते हैं या नहीं?
Sita Soren vs Union of India (2024) भारत के संवैधानिक कानून और संसदीय विशेषाधिकार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सुप्रीम कोर्ट का फैसला है। इस फैसले में सर्वोच्च न्यायालय की 7 जजों की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया कि सांसद या विधायक सदन में भाषण देने या वोट देने से संबंधित रिश्वतखोरी के आरोप में अनुच्छेद 105(2) या 194(2) के तहत आपराधिक अभियोजन से immunity का दावा नहीं कर सकते।
यह फैसला विशेष रूप से UPSC, UKPSC, UKSSSC, PCS, SSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे संसदीय विशेषाधिकार, भ्रष्टाचार और न्यायिक समीक्षा से जुड़े कई संवैधानिक प्रश्न जुड़े हैं।
Sita Soren Case 2024 क्या है?
मामला झारखंड विधानसभा की सदस्य सीता सोरेन से संबंधित था। उन पर आरोप था कि उन्होंने राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने के लिए रिश्वत स्वीकार की थी। उन्होंने आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देते हुए संविधान के अनुच्छेद 194(2) के तहत प्राप्त संसदीय विशेषाधिकार का सहारा लिया।
इस मामले में मुख्य सवाल यह था कि क्या किसी सांसद या विधायक को भाषण या वोट के संबंध में रिश्वत लेने के आरोप में संविधान द्वारा दी गई संसदीय immunity प्राप्त हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की संविधान पीठ का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 4 मार्च 2024 को अपने फैसले में कहा कि सांसद या विधायक रिश्वतखोरी के आरोप में अनुच्छेद 105(2) या 194(2) के तहत आपराधिक अभियोजन से immunity नहीं मांग सकते।
अदालत ने माना कि रिश्वत लेना स्वयं एक आपराधिक कृत्य है और इसे विधायी कार्यों के लिए उपलब्ध संवैधानिक विशेषाधिकार के दायरे में नहीं रखा जा सकता।
अर्थात्, यदि कोई विधायक या सांसद किसी वोट या भाषण के बदले रिश्वत लेने का आरोप झेलता है, तो केवल यह तथ्य कि वह वोट या भाषण विधायी कार्यवाही से जुड़ा था, उसे आपराधिक अभियोजन से सुरक्षा नहीं देता।
अनुच्छेद 105(2) क्या कहता है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 105 संसद के सदस्यों की शक्तियों, विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों से संबंधित है।
अनुच्छेद 105(2) के तहत संसद में कही गई बात या दिए गए वोट के संबंध में सदस्यों को न्यायालयीय कार्यवाही से विशेष सुरक्षा प्राप्त है।
इस प्रावधान का उद्देश्य सांसदों को इस बात की स्वतंत्रता देना है कि वे संसद में बिना भय या बाहरी दबाव के अपने विचार व्यक्त कर सकें और मतदान कर सकें।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस immunity को रिश्वतखोरी जैसे स्वतंत्र आपराधिक कृत्य तक विस्तारित नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 194 राज्य विधानमंडलों के सदस्यों के शक्तियों, विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों से संबंधित है।
अनुच्छेद 105(2) जहां संसद के सदस्यों से संबंधित है,
वहीं अनुच्छेद 194(2) राज्य विधानमंडल के सदस्यों को समान प्रकार की सुरक्षा प्रदान करता है।
सीता सोरेन का मामला इसी अनुच्छेद 194(2) से सीधे जुड़ा था।