📈 उत्तराखंड टेस्ट 95
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Green GDP क्या है?
भारत सरकार की Economic Survey 2025-26 में पहली बार Green GDP (हरित सकल घरेलू उत्पाद) का नया फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया गया। इस पहल का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास को मापना नहीं, बल्कि पर्यावरण को होने वाले नुकसान का भी आर्थिक मूल्यांकन करना है।
पारंपरिक GDP किसी देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को दर्शाती है। इसके विपरीत, Green GDP प्राकृतिक संसाधनों की हानि, प्रदूषण और पर्यावरणीय क्षति को घटाकर वास्तविक आर्थिक विकास की तस्वीर प्रस्तुत करती है। यही कारण है कि इसे सतत विकास (Sustainable Development) का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।
Green GDP की आवश्यकता क्यों पड़ी?
आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ते प्रदूषण जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।
यदि किसी देश की GDP लगातार बढ़ रही हो, लेकिन उसी समय जंगलों की कटाई, जल प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन भी तेजी से बढ़ रहे हों, तो उस आर्थिक विकास को पूरी तरह संतुलित नहीं माना जा सकता।
इसी समस्या का समाधान प्रस्तुत करने के लिए Green GDP की अवधारणा विकसित की गई, ताकि विकास और पर्यावरण दोनों का एक साथ मूल्यांकन किया जा सके।
Green GDP की गणना कैसे होती है?
Green GDP निकालते समय सामान्य GDP से पर्यावरण को हुए नुकसान की लागत घटाई जाती है।
सरल सूत्र
Green GDP = GDP – पर्यावरणीय क्षति – प्राकृतिक संसाधनों की कमी
इस गणना में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाता है।
- वनों की कटाई
- वायु प्रदूषण
- जल प्रदूषण
- मिट्टी का क्षरण
- प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन
- कार्बन उत्सर्जन
सामान्य GDP और Green GDP में अंतर
| सामान्य GDP | Green GDP |
|---|---|
| केवल आर्थिक उत्पादन मापती है | आर्थिक उत्पादन के साथ पर्यावरणीय प्रभाव भी मापती है |
| पर्यावरणीय नुकसान शामिल नहीं होता | पर्यावरणीय नुकसान को घटाया जाता है |
| पारंपरिक आर्थिक सूचकांक | सतत विकास का आधुनिक सूचकांक |
| केवल उत्पादन पर केंद्रित | उत्पादन और पर्यावरण दोनों पर केंद्रित |
Green GDP के प्रमुख लाभ
1. सतत विकास को बढ़ावा
Green GDP आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व देती है।
2. बेहतर नीति निर्माण
इस सूचकांक की मदद से सरकार ऐसी नीतियाँ बना सकती है जो विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखें।
3. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
वन, जल, भूमि और खनिज संसाधनों के संरक्षण के लिए अधिक प्रभावी योजनाएँ तैयार करना आसान हो जाता है।
4. जलवायु परिवर्तन से मुकाबला
पर्यावरणीय नुकसान का आर्थिक मूल्यांकन होने से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझना और कम करना अधिक सरल हो जाता है।
Green GDP की चुनौतियाँ
Green GDP लागू करना एक जटिल प्रक्रिया है।
मुख्य चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं—
- पर्यावरणीय नुकसान का सटीक मूल्यांकन
- विश्वसनीय आँकड़ों की उपलब्धता
- सभी राज्यों के लिए समान मापदंड तैयार करना
- प्राकृतिक संसाधनों का आर्थिक मूल्य निर्धारित करना
- विभिन्न क्षेत्रों से डेटा एकत्र करना
Economic Survey 2025-26 में Green GDP का महत्व
Economic Survey 2025-26 में प्रस्तुत Green GDP फ्रेमवर्क भारत की अर्थव्यवस्था के मूल्यांकन में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
भविष्य में नीति निर्माण के दौरान इस मॉडल का उपयोग पर्यावरणीय प्रभावों को समझने में किया जा सकेगा। साथ ही, यह सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और जलवायु परिवर्तन से जुड़े निर्णयों को अधिक प्रभावी बनाने में भी सहायक हो सकता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- टॉपिक: Green GDP
- रिपोर्ट: Economic Survey 2025-26
- मुख्य उद्देश्य: पर्यावरणीय नुकसान को ध्यान में रखकर वास्तविक आर्थिक विकास मापना
- संबंधित विषय: Environment, Economy, Sustainable Development
- महत्वपूर्ण परीक्षाएँ: UPSC, UKPSC, UKSSSC, SSC, PCS, Banking
सामान्य GDP केवल आर्थिक उत्पादन को मापती है, जबकि Green GDP आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय प्रभावों को भी शामिल करती है।
Green GDP क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सतत विकास को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने और बेहतर आर्थिक नीतियाँ बनाने में मदद करती है।
Green GDP किस रिपोर्ट में प्रस्तुत किया गया?
Economic Survey 2025-26 में Green GDP का नया फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया गया।
निष्कर्ष
Green GDP भारत की आर्थिक सोच में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत है। यह केवल उत्पादन और आय बढ़ाने पर ध्यान नहीं देती, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी विकास का अभिन्न हिस्सा मानती है। आने वाले वर्षों में यह सूचकांक आर्थिक नीति, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास से जुड़े निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से भी Green GDP एक अत्यंत महत्वपूर्ण समसामयिक विषय है।