Uttarakhand Tribes- उत्तराखंड की कुछ जनजातियां PDF Download का लिंक सबसे नीचे दिया है–

जनजाति (Tribes)
जनजाति एक ऐसे लोगों का समूह होता है जो किसी एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में ( पहाड़ी या जंगली क्षेत्र) में रहते हैं तथा जिनकी अलग – अलग संस्कृति, भाषा, रीति – रिवाज, रहन – सहन हो, और जो आधुनिक सभ्यता से प्रभावित ना होकर अपना एक पारंपरिक जीवन व्यतीत करते हैं।

उत्तराखंड की जनजाति

 1 – भोटिया जनजाति (bhotiya tribe)
2 – जौनसारी जनजाति (jonsari tribe)
3 – राजी जनजाति (raji tribe)
4 – थारू जनजाति (tharu tribe)
5 – बोक्सा जनजाति (bhoksa tribe)

 1 – भोटिया जनजाति (bhotiya tribe) –

कुछ भोटिया अपने को किरातवंशी मानते हैं तो कुछ अपने को खस राजपूत भी कहते हैं यह उत्तराखंड की एक अर्द्धघूमन्तु जनजाति है यह महाहिमालयों की तलहटी में रहती हैं। यह उत्तराखंड की सबसे प्राचीन जनजाति है भोटिया जनजाति की उत्पत्ति ‘भोट’ या ‘भूट’ से हुई है।भोटिया की निम्न उपजातीयां हैं :-1 – मारछा  2.तोलछा  3.जोहारी  4.शौका  5.दरमियां  6.चौंदासी  7.व्यासी  8.जाड़  9.जेठारा  10.छापडा़(बखरिया)

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आवास एवं बस्तियां :-

1 – भोटिया जनजाति की अधिकतर जनसंख्या महा हिमालय की तलहटी में निवास करती है।
2 – भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप मकान छोटे दरवाजे मकानों में लकड़ी का अधिक प्रयोग
3 – यह भोटिया जनजाति के लोग उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, चमोली व अल्मोड़ा के क्षेत्रों में फैले हैं
4 – विष्णुगंगा घाटी में माणा, वनाकुली, औधगाँव में
5 – जोहार घाटी मुनस्यारी के क्षेत्रों में
6 – भागीरथी घाटी में नेलांग तथा जाडंग गांवों में मुखाकृति और वेशभूषा भोटिया जनजाति जो है वो तिब्बती एवं मंगोलियन जाति का मिश्रण हैं भोटिया युवक पायजामा व कोट के साथ पहाड़ी टोपी पहनते हैं और स्त्रियाँ ऊँची बाँहों वाला कोट पहनती हैं इस कोट को चुंग कहते हैं स्त्रियाँ लम्बा कुर्ता पहनती हैं वह गले मूंगे की माला पहनती हैं यह भोटिया स्त्रियों का मुख्य आभूषण होता है।

भोजन :

भोजन में छाकू(भात), छामा (दाल) और कूटो (रोटी) प्रमुख हैं माँस, मदिरा को छंग कहते हैं जौ गेहूं मंडुवा व सत्तू भी प्रमुख हैं

इनमें अपहरण विवाह की प्रथा प्रचलित है।

हुड़के वाध्ययंत्र बजाकर यह लोग अपना मनोरंजन करते हैं।

यह पशुपालन और कृषि से अपनी आजीविका चलाते हैं।

2 – जौनसारी जनजाति (jaunsari tribe) –

यह राज्य का सबसे बड़ा समुदाय है गढ़वाल मंडल की मुख्य सबसे बड़ी जनजाति है कालसी, चकराता, त्यूनी, लाखामंडल जौनपुर, टिहरी में विद्यमान रहते हैं।

कालसी, चकराता और त्यूनी को सयुंक्त रूप से जौनसार बाबर कहा जाता है। यह जौनसारी जनजाति पाण्डवों को अपना पूर्वज मानते हैं इनकी मुख्य भाषा जौनसारी है जौनसार बाबर में 39 पट्टी तथा 358 राजस्व ग्राम है वेशभूषा :-पुरुष परिधान – झंगोली (ऊनी पयजामा कोट, डिगुवा (ऊनी टोपी), वफकन (गरम चोगा) महिला परिधान – झग्गा (सूती कुर्ती, घाघरा), ढाँट (रुमाल), आल (रंग बिरंगे जूते), बास्केट को सलका या ठलका कहते हैं 

सामाजिक व्यवस्था :-

1 – यह एक पितृसत्तात्मक व्यवस्था है
2 – यहां एक संयुक्त परिवार प्रथा है
3 – विवाह पूर्व लड़की ‘ध्यान्ति’ व विवाहोपरांत ‘रयान्ति’ कहलाती है
4 – बहुपति विवाह प्रचलन अब समाप्त है
5 – यह मुख्य रूप से हिंदू धर्म का अनुसरण करते हैं
6 – प्रमुख देवता महासू है
7 – अन्य में वाशिक बोठा प्रवासी व चोल्दा कुलदेवता के रूप में प्रसिद्ध है
8 – इनके मंदिर पत्थर व लकड़ी से निर्मित होते हैं इनका प्रमुख तीर्थस्थल हनोल है
9 – पहले पंचायत की जगह खुमरी नामक समिति थी
10 – खुमरी का प्रमुख सयाणा कहलाता था

लोकगीत :-

इनके प्रमुख लोकगीत हारूल, मांगल, छोड़े, विरासू, शिलोंगु, केदारछाया, रणारात, गोडाबडा है

लोकनृत्य :-

इनके प्रमुख लोक नृत्यहारूला नृत्य, परात नृत्य, रासो नृत्य, तांदी नृत्य फोन ठुमकिया नृत्य, झुमसु, झेला, पत्तेबाजी, रास-रासो, मंडवड़ा, सराय, जंगबाजी नृत्य आदि

प्रमुख त्योहार व मेले:-

1 – विस्सू – (वैशाखी पर) 
2 – जागड़ा – भादों माह में ( महासू देवता स्नान) 
3 – नुणाई – सावन में
4 – दीपावली – एक माह बाद बनाते हैं भिमल का होला जलाया जाता है इस दिन को भिरुड़ी कहा जाता है भिरूड़ी पर भैला खेला जाता है
5 – जन्माष्टमी को यह लोग अठोई पर्व के रूप में मनाते हैं
6 – माघ त्यौहार 1 माह तक चलता है
7 – दशहरा – दशहरा को पांचो के (पांडव त्यौहार) के रूप में मनाया जाता हैविजयदशमी को पायथा कहा जाता हैस्थानीय भाषा में मेलों को गनयान/ गणयात भी कहा जाता है

प्रमुख मेले :-

विसू मेला, वीर केसरी मेला, मोण मेला, नुणाई मेला

3 – राजी जनजाति (raji tribe) – 

1 – यह (uttarakhand tribes) मुख्यतः पिथौरागढ़ में निवास करती है
2 – यह एकमात्र आदिम जनजाति है
3 – क्या कोल – किरात वंशज से संबंधित है
4 – छोटा कद ऊँचे होंठ व चौड़ा चेहरा

सामाजिक व्यवस्था:-

1 – विवाह पूर्व साँगजांगी व पिन्ठा प्रथा
2 – इनके निवास स्थान को रौत्यूड़ा कहा जाता है
3 – मातृभाषा मुंडा परंतु स्थानीय भाषा का भी प्रभाव रहता है
4 – वधू मूल्य प्रथा काफी प्रचलन में है पलायन विवाह कम है
5 – वर्तमान में शिक्षक का व्यापक प्रचार – प्रसार

धार्मिक जीवन:-

1 – यह (uttarakhand tribes) हिंदू धर्म का अनुसरण करते हैं
2 – गध्यनाथ, मलयनाथ, गणनाथ, सैम, मल्लिकार्जुन, नंदा देवी आदि प्रमुख हैं परंतु बाद्यनाथ प्रमुख देवता है
3 – कारक व मकर सक्रांति इनके प्रमुख त्यौहार हैं
4 –  इनका प्रमुख नृत्य रिंगडांस है

अर्थव्यवस्था :-

1 – काष्ठ कला व झूम खेती इनके प्रमुख कार्य हैं
2 – पहले यह अपना जीवन मूक विनिमय द्वारा बिताते थे
3 – आखेट और जड़ी-बूटियों का संग्रहण भी इनका प्रमुख कार्य है
4 – वर्तमान में व्यापक शिक्षा का प्रचार-प्रसार

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