📈 उत्तराखंड टेस्ट 122
📋 टेस्ट की जानकारी
- 📌 कुल प्रश्न: 30 प्रश्न
- ⏱️ कुल समय: 20 मिनट
- ✅ प्रत्येक सही: 1 अंक
- ❌ नेगेटिव मार्किंग: -0.25
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अनुच्छेद 137: सर्वोच्च न्यायालय की Review Power क्या है?
भारतीय संविधान में सर्वोच्च न्यायालय को देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था का दर्जा प्राप्त है। संविधान के अनुच्छेद 137 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को अपने द्वारा दिए गए किसी निर्णय या आदेश की समीक्षा (Review) करने की शक्ति प्राप्त है। यह शक्ति न्यायिक व्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे न्यायालय को अपने निर्णय में हुई स्पष्ट त्रुटि को सुधारने का अवसर मिलता है।
अनुच्छेद 137 के अनुसार, संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून या संविधान के अनुच्छेद 145 के तहत बनाए गए नियमों के अधीन, सर्वोच्च न्यायालय को अपने द्वारा सुनाए गए निर्णयों या आदेशों की समीक्षा करने की शक्ति प्राप्त है। इसका उद्देश्य किसी पक्ष को सामान्य रूप से दोबारा मुकदमा लड़ने का अवसर देना नहीं, बल्कि न्याय में हुई गंभीर या स्पष्ट त्रुटि को सुधारना है।
Review Petition क्या होती है?
यदि किसी पक्ष को लगता है कि सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय में ऐसी स्पष्ट कानूनी या तथ्यात्मक त्रुटि रह गई है, जो रिकॉर्ड के आधार पर दिखाई देती है, तो वह Review Petition दाखिल कर सकता है। हालांकि, केवल इस आधार पर कि पक्षकार न्यायालय के निर्णय से असहमत है, Review Petition स्वीकार नहीं की जाती।
Review और Appeal में भी महत्वपूर्ण अंतर है। Appeal में उच्च न्यायालय या सक्षम न्यायालय से निर्णय की पुनः व्यापक जांच की मांग की जाती है, जबकि Review उसी न्यायालय के समक्ष उसके अपने निर्णय की सीमित पुनर्समीक्षा है।
सर्वोच्च न्यायालय के नियमों के अनुसार Review की शक्ति का प्रयोग सीमित परिस्थितियों में किया जाता है। इसके बाद भी यदि गंभीर न्यायिक त्रुटि का प्रश्न हो, तो कुछ परिस्थितियों में Curative Petition का मार्ग उपलब्ध हो सकता है।
इस प्रकार, अनुच्छेद 137 न्यायिक व्यवस्था में न्याय की शुद्धता, त्रुटि-सुधार और संवैधानिक संतुलन बनाए रखने का महत्वपूर्ण साधन है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इससे संबंधित प्रश्न अक्सर अनुच्छेद 137, Review Petition और Curative Petition के अंतर पर पूछे जा सकते हैं।