📈 उत्तराखंड टेस्ट 143
📋 टेस्ट की जानकारी
- 📌 कुल प्रश्न: 30 प्रश्न
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लक्ष्मी चौकी क्या है? जानिए कुमाऊँ की प्रसिद्ध ऐपण कला और इसका महत्व
लक्ष्मी चौकी उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र की प्रसिद्ध पारंपरिक ऐपण कला का एक महत्वपूर्ण रूप है।
दीपावली जैसे शुभ अवसरों पर घरों में देवी लक्ष्मी के स्वागत और पूजा के लिए लक्ष्मी चौकी बनाई जाती है। यह उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक चित्रकला का सुंदर उदाहरण है।
लक्ष्मी चौकी क्या होती है?
लक्ष्मी चौकी एक विशेष प्रकार की पारंपरिक ज्यामितीय आकृति होती है, जिसे ऐपण कला की शैली में बनाया जाता है। इसे मुख्य रूप से पूजा स्थल पर तैयार किया जाता है।
पारंपरिक रूप से इसके लिए गेरू और चावल से तैयार सफेद बिस्वार का प्रयोग किया जाता है।
दीपावली के अवसर पर लक्ष्मी चौकी के साथ देवी लक्ष्मी के पदचिह्न भी बनाए जाते हैं। इन पदचिह्नों का प्रतीकात्मक अर्थ देवी लक्ष्मी के घर में आगमन से जुड़ा हुआ है।
ऐपण कला का सांस्कृतिक महत्व
ऐपण उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र की पारंपरिक लोकचित्रकला है। इसे घरों की देहरी, पूजा स्थल और विभिन्न धार्मिक एवं मांगलिक अवसरों पर बनाया जाता है। अलग-अलग अवसरों के अनुसार ऐपण की अलग-अलग आकृतियाँ और रूप देखने को मिलते हैं।
लक्ष्मी चौकी विशेष रूप से दीपावली की पूजा से जुड़ी होने के कारण कुमाऊँ की सांस्कृतिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- लक्ष्मी चौकी: ऐपण कला का प्रमुख रूप
- क्षेत्र: कुमाऊँ, उत्तराखंड
- प्रमुख अवसर: दीपावली
- संबंध: देवी लक्ष्मी की पूजा और स्वागत
- पारंपरिक सामग्री: गेरू और बिस्वार
- विशेषता: ज्यामितीय आकृतियाँ और लक्ष्मी के पदचिह्न
UKPSC, UKSSSC, UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तराखंड की लोककला और संस्कृति से प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए लक्ष्मी चौकी और ऐपण कला के बीच संबंध को जरूर याद रखें।