UKSSSC / UKPSC टेस्ट 13
📋 टेस्ट की जानकारी
- 📌 कुल प्रश्न: 30 प्रश्न (Very Very Hard)
- ⏱️ कुल समय: 20 मिनट
- ✅ प्रत्येक सही: 1 अंक
- ❌ नेगेटिव मार्किंग: -0.25
- 📝 लंबे प्रश्न: पूरा टेक्स्ट दिखेगा
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रक्षासूत्र आंदोलन क्या है? जानिए उत्तराखंड के जंगलों को बचाने वाले आंदोलन का इतिहास
रक्षासूत्र आंदोलन उत्तराखंड के पर्यावरण आंदोलनों में एक महत्वपूर्ण नाम है।
पेड़ों को बचाने के लिए चलाए गए इस आंदोलन में पेड़ों को रक्षासूत्र यानी राखी बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया गया था। उत्तराखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं में इस आंदोलन से जुड़े प्रश्न विशेष रूप से पूछे जा सकते हैं।
रक्षासूत्र आंदोलन की शुरुआत कब और कहाँ हुई?
रक्षासूत्र आंदोलन की शुरुआत 1994 में टिहरी गढ़वाल की भिलंगना घाटी में हुई थी। इस आंदोलन का उद्देश्य क्षेत्र के जंगलों को अनियंत्रित कटाई से बचाना और स्थानीय लोगों में पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत करना था।
इस आंदोलन का नेतृत्व पर्यावरण कार्यकर्ता सुरेश भाई से जोड़ा जाता है। आंदोलन के दौरान ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने पेड़ों को अपना रक्षक मानते हुए उनके तनों पर रक्षासूत्र बांधे।
रक्षासूत्र आंदोलन का महत्व
उत्तराखंड में जंगल केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण जीवन, जलस्रोत, पशुपालन और स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी सीधे जुड़े हैं। इसलिए जंगलों की रक्षा का अर्थ स्थानीय जीवन और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा भी है।
रक्षासूत्र आंदोलन ने पेड़ और मनुष्य के भावनात्मक संबंध को आंदोलन का आधार बनाया। यह उत्तराखंड के पर्यावरण संरक्षण आंदोलनों की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है जिसमें स्थानीय समुदायों की भागीदारी महत्वपूर्ण रही है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- आंदोलन: रक्षासूत्र आंदोलन
- वर्ष: 1994
- क्षेत्र: भिलंगना घाटी, टिहरी गढ़वाल
- प्रमुख नाम: सुरेश भाई
- मुख्य उद्देश्य: वनों और पेड़ों की रक्षा
- विशेष तरीका: पेड़ों को रक्षासूत्र बांधना
संभावित परीक्षा प्रश्न
प्रश्न: उत्तराखंड में 1994 में पेड़ों को रक्षासूत्र बांधकर वन संरक्षण से जुड़ा आंदोलन कौन-सा था?
उत्तर: रक्षासूत्र आंदोलन।
Exam Trick:
“राखी बाँधी → पेड़ बचाए → रक्षासूत्र आंदोलन” — इस ट्रिक से इसे आसानी से याद रखा जा सकता है।
उत्तराखंड के UKPSC, UKSSSC, पटवारी, लेखपाल, पुलिस और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को रक्षासूत्र आंदोलन से जुड़े वर्ष, स्थान और प्रमुख व्यक्ति को जरूर याद रखना चाहिए।