UKSSSC TEST 18

UKSSSC / UKPSC टेस्ट 18 – Extreme Hard 30 प्रश्न | GyanLeela
UKSSSC / UKPSC 2026
टेस्ट 18 • Extreme Hard

UKSSSC / UKPSC टेस्ट 18

Extreme Hard • 30 प्रश्न • 12 अक्टूबर 2026

📋 टेस्ट की जानकारी

  • 📌 कुल प्रश्न: 30 प्रश्न (Extreme Hard)
  • ⏱️ कुल समय: 25 मिनट
  • ✅ प्रत्येक सही: 1 अंक
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  • 📝 लंबे प्रश्न: पूरा टेक्स्ट दिखेगा

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UKSSSC परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न: “उसी तपस्वी से लंबे थे, देवदार दो चार खड़े” में कौन सा अलंकार है?

प्रस्तावना

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की परीक्षाओं में हिंदी साहित्य और व्याकरण से जुड़े प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इन परीक्षाओं में अलंकार, संधि, तत्सम-तद्भव शब्द, मुहावरे और लोकोक्तियों से प्रश्न पूछे जाते हैं। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण प्रश्न है जो हिंदी काव्यशास्त्र के अलंकारों से संबंधित है। यह प्रश्न UKSSSC TEST 18 में शामिल किया गया है, जो परीक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।

प्रश्न का विवरण

प्रश्न: “उसी तपस्वी से लंबे थे, देवदार दो चार खड़े।” इस पंक्ति में कौन सा अलंकार प्रयुक्त हुआ है?

विकल्प:

  • A) रूपक अलंकार
  • B) श्लेष अलंकार
  • C) प्रतीप अलंकार
  • D) व्यतिरेक अलंकार

सही उत्तर: C) प्रतीप अलंकार

प्रतीप अलंकार क्या है?

प्रतीप अलंकार हिंदी काव्यशास्त्र का एक महत्वपूर्ण अलंकार है। ‘प्रतीप’ शब्द का अर्थ होता है – उल्टा या विपरीत। जब काव्य में उपमेय (जिसकी तुलना की जाए) को उपमान (जिससे तुलना की जाए) से बड़ा या श्रेष्ठ बताया जाए, अर्थात् उपमा को उल्टा कर दिया जाए, तो वहाँ प्रतीप अलंकार होता है।

सरल शब्दों में, जब कवि सामान्य उपमा के विपरीत उपमान को उपमेय से हीन या छोटा दिखाता है, तो प्रतीप अलंकार की सृष्टि होती है। यह अलंकार उपमा का विलोम है।

पंक्ति का विश्लेषण

प्रस्तुत पंक्ति “उसी तपस्वी से लंबे थे, देवदार दो चार खड़े” में कवि ने तपस्वी (मनुष्य) की तुलना देवदार के पेड़ों से की है। सामान्यतः उपमा अलंकार में मनुष्य को पेड़ से छोटा या कमजोर दिखाया जाता है, लेकिन यहाँ कवि ने उल्टा कर दिया है – देवदार के पेड़ तपस्वी से लंबे बताए गए हैं। यहाँ उपमेय (तपस्वी) को उपमान (देवदार) से बड़ा या श्रेष्ठ नहीं, बल्कि उपमान को उपमेय के साथ खड़ा दिखाया गया है, जिससे प्रतीप अलंकार की सृष्टि होती है।

वास्तव में, यहाँ कवि यह कहना चाहता है कि तपस्वी की तपस्या और त्याग के सामने देवदार के विशाल वृक्ष भी छोटे पड़ जाते हैं। यह उलटी तुलना प्रतीप अलंकार का सुंदर उदाहरण है।

अन्य अलंकारों से अंतर

रूपक अलंकार: जब उपमेय और उपमान में कोई अंतर न रह जाए, अर्थात् एक वस्तु को दूसरी वस्तु मान लिया जाए, तो रूपक अलंकार होता है। जैसे – “चरण कमल बंदौं हरिराई।”

श्लेष अलंकार: जब एक ही शब्द के अनेक अर्थ निकलते हैं, तो श्लेष अलंकार होता है। जैसे – “रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून।।”

व्यतिरेक अलंकार: जब उपमेय को उपमान से श्रेष्ठ बताया जाए, तो व्यतिरेक अलंकार होता है। जैसे – “अरुण यह मधुमय देश हमारा।”

प्रतीप अलंकार: जब उपमान को उपमेय से बड़ा या श्रेष्ठ दिखाया जाए, तो प्रतीप अलंकार होता है। यह व्यतिरेक अलंकार का विलोम है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

UKSSSC और UKPSC की परीक्षाओं में अलंकार से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। छात्रों को चाहिए कि वे सभी प्रमुख अलंकारों की परिभाषा, उदाहरण और पहचान के नियमों को अच्छी तरह याद करें। प्रतीप अलंकार एक तकनीकी अलंकार है, जिसे समझने के लिए उपमा और व्यतिरेक अलंकार से इसके अंतर को स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है।

इस प्रश्न में यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह UKPSC स्तर का तकनीकी प्रश्न है, जिसमें उपमेय और उपमान की भूमिका को उलटकर देखा गया है। छात्रों को चाहिए कि वे काव्य पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों को पहचानने का अभ्यास करें।

निष्कर्ष

“उसी तपस्वी से लंबे थे, देवदार दो चार खड़े” पंक्ति में प्रतीप अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है। यह अलंकार उपमा के उल्टे प्रयोग पर आधारित है, जिसमें उपमान को उपमेय से बड़ा या श्रेष्ठ दिखाया जाता है। UKSSSC और UKPSC की परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हिंदी साहित्य के तकनीकी पक्ष को समझने में सहायक है। अलंकारों की सही समझ से न केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं, बल्कि हिंदी साहित्य की गहराई को भी समझा जा सकता है।

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