📈 उत्तराखंड टेस्ट 118
📋 टेस्ट की जानकारी
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99वां संविधान संशोधन और NJAC: जानिए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग से जुड़ी पूरी जानकारी
भारतीय संविधान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को विशेष महत्व दिया गया है। न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़ा राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) भारतीय संवैधानिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसे UPSC, PCS, SSC, Judiciary और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जा सकता है। NJAC का गठन 99वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2014 के माध्यम से किया गया था।
NJAC क्या था?
राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग यानी National Judicial Appointments Commission (NJAC) का उद्देश्य भारत के सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा स्थानांतरण की प्रक्रिया में बदलाव करना था। इससे पहले न्यायाधीशों की नियुक्ति में प्रचलित कॉलेजियम प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
99वें संविधान संशोधन के साथ ही National Judicial Appointments Commission Act, 2014 भी पारित किया गया। प्रस्तावित NJAC में भारत के मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश, केंद्रीय कानून मंत्री तथा दो प्रतिष्ठित व्यक्तियों को शामिल किया जाना था।
सुप्रीम कोर्ट ने NJAC को क्यों रद्द किया?
वर्ष 2015 में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने 99वें संविधान संशोधन और NJAC अधिनियम को असंवैधानिक घोषित कर दिया। न्यायालय ने माना कि प्रस्तावित व्यवस्था न्यायपालिका की स्वतंत्रता तथा संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) को प्रभावित कर सकती है।
इसके बाद न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए पहले से चली आ रही कॉलेजियम प्रणाली को बरकरार रखा गया।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
99वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2014 → NJAC → न्यायाधीशों की नियुक्ति → 2015 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक घोषित।
यह प्रश्न विशेष रूप से भारतीय संविधान, न्यायपालिका, मौलिक संरचना सिद्धांत और संवैधानिक संशोधन से संबंधित परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।