📈 उत्तराखंड टेस्ट 119
📋 टेस्ट की जानकारी
- 📌 कुल प्रश्न: 30 प्रश्न
- ⏱️ कुल समय: 20 मिनट
- ✅ प्रत्येक सही: 1 अंक
- ❌ नेगेटिव मार्किंग: -0.25
- 📝 टेस्ट कैसे दें: सही विकल्प पर क्लिक/टच करें
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🔑 उत्तर कुंजी
पेशावर कांड 1930 और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का साहस
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में पेशावर कांड 1930 एक ऐसी ऐतिहासिक घटना है, जिसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय सैनिकों के साहस और देशभक्ति को प्रदर्शित किया। इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण नाम वीर चंद्र सिंह गढ़वाली है, जिन्हें उनके साहस और मानवता के लिए आज भी याद किया जाता है।
23 अप्रैल 1930 को पेशावर के किस्सा ख्वानी बाजार में ब्रिटिश शासन के खिलाफ बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे थे। उस समय ब्रिटिश सरकार ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए सेना को बुलाया। सैनिकों को निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया।
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उस समय 2/18 रॉयल गढ़वाल राइफल्स में सैनिक थे। उन्हें भी अपने साथियों के साथ प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश मिला। लेकिन उन्होंने इस आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया। उनका मानना था कि निहत्थे लोगों पर गोली चलाना उचित नहीं था।
इस घटना ने ब्रिटिश सरकार को काफी परेशान कर दिया। सैन्य अनुशासन के विरुद्ध जाकर गोली चलाने से इनकार करने के कारण वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और उनके साथियों को कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
पेशावर कांड भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह घटना बताती है कि भारतीय सैनिकों के भीतर भी स्वतंत्रता और मानवता की भावना कितनी मजबूत हो चुकी थी। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों में गिने जाते हैं और उनका नाम उत्तराखंड के इतिहास में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- पेशावर कांड: 23 अप्रैल 1930
- स्थान: किस्सा ख्वानी बाजार, पेशावर
- प्रमुख व्यक्तित्व: वीर चंद्र सिंह गढ़वाली
- बटालियन: 2/18 रॉयल गढ़वाल राइफल्स
- मुख्य घटना: निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से इनकार
UPSC, PCS, UKPSC, UKSSSC, पुलिस और सेना भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए पेशावर कांड एक महत्वपूर्ण इतिहास विषय है।