📈 उत्तराखंड टेस्ट 133
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अनुच्छेद 142 क्या है? जानिए सुप्रीम कोर्ट की ‘पूर्ण न्याय’ की शक्ति
अनुच्छेद 142 (Article 142) भारतीय संविधान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) को किसी लंबित मामले में “पूर्ण न्याय” (Complete Justice) करने के लिए आवश्यक आदेश या डिक्री जारी करने की शक्ति प्रदान करता है। प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, SSC, PCS, Judiciary और अन्य सरकारी परीक्षाओं में अनुच्छेद 142 से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
अनुच्छेद 142 क्या कहता है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को यह शक्ति देता है कि वह अपने समक्ष लंबित किसी मामले या विषय में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक आदेश या डिक्री पारित कर सकता है।
सरल शब्दों में समझें तो यदि किसी मामले में सामान्य कानूनी प्रावधानों के माध्यम से न्याय का उद्देश्य पूरी तरह प्राप्त नहीं हो पा रहा हो, तो सर्वोच्च न्यायालय परिस्थितियों के अनुसार ऐसा आदेश दे सकता है जो पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हो।
अनुच्छेद 142 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
अनुच्छेद 142 का मूल उद्देश्य न्यायालय को ऐसी परिस्थितियों में प्रभावी न्याय देने में सक्षम बनाना है, जहां केवल पारंपरिक कानूनी उपाय पर्याप्त न हों।
इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:
- न्याय को पूर्ण और प्रभावी बनाना
- न्यायिक प्रक्रिया में उत्पन्न व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करना
- असाधारण परिस्थितियों में उचित राहत प्रदान करना
- लंबित मामलों में न्याय के उद्देश्य को पूरा करना
अनुच्छेद 142 की शक्ति किसे प्राप्त है?
यह शक्ति भारत के सर्वोच्च न्यायालय को प्राप्त है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अनुच्छेद 142 उच्च न्यायालयों (High Courts) को ऐसी ही संवैधानिक शक्ति प्रदान नहीं करता।
इसलिए परीक्षा में यदि पूछा जाए कि “पूर्ण न्याय करने की शक्ति किस अनुच्छेद के तहत सर्वोच्च न्यायालय को प्राप्त है?”, तो सही उत्तर होगा:
अनुच्छेद 142
क्या अनुच्छेद 142 कानून से ऊपर है?
यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न है। अनुच्छेद 142 की शक्ति बहुत व्यापक है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि सर्वोच्च न्यायालय मनमाने ढंग से किसी भी कानून को समाप्त कर सकता है या संविधान के मूल प्रावधानों की अनदेखी कर सकता है।
इस शक्ति का प्रयोग पूर्ण न्याय करने के उद्देश्य से किया जाता है और न्यायालय को संवैधानिक सीमाओं तथा न्यायिक सिद्धांतों को ध्यान में रखना होता है।
अनुच्छेद 142 और अन्य महत्वपूर्ण अनुच्छेदों में अंतर
प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुच्छेद 142 को अक्सर अनुच्छेद 136, 141 और 143 के साथ भ्रमित किया जाता है।
| अनुच्छेद | मुख्य विषय |
|---|---|
| अनुच्छेद 136 | विशेष अनुमति से अपील (Special Leave to Appeal) |
| अनुच्छेद 141 | सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित कानून सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी |
| अनुच्छेद 142 | पूर्ण न्याय के लिए आवश्यक आदेश/डिक्री |
| अनुच्छेद 143 | राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श |
इसलिए याद रखने का आसान तरीका है:
136 → Special Leave
141 → Law declared by Supreme Court
142 → Complete Justice
143 → Presidential Reference
अनुच्छेद 142 का महत्व
भारतीय न्याय व्यवस्था में अनुच्छेद 142 को महत्वपूर्ण इसलिए माना जाता है क्योंकि यह सर्वोच्च न्यायालय को केवल विवाद का निर्णय करने तक सीमित नहीं रखता, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार प्रभावी और पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश देने की क्षमता प्रदान करता है।
इसी कारण इसे सर्वोच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण संवैधानिक शक्तियों में गिना जाता है।
परीक्षा में पूछे जाने वाला महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न: भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद सर्वोच्च न्यायालय को “पूर्ण न्याय” (Complete Justice) करने के लिए आवश्यक आदेश या डिक्री जारी करने की शक्ति प्रदान करता है?
A) अनुच्छेद 136
B) अनुच्छेद 141
C) अनुच्छेद 142
D) अनुच्छेद 143
सही उत्तर: C) अनुच्छेद 142
व्याख्या
अनुच्छेद 142 के तहत सर्वोच्च न्यायालय अपने समक्ष लंबित किसी मामले या विषय में पूर्ण न्याय (Complete Justice) करने के लिए आवश्यक आदेश या डिक्री पारित कर सकता है।
UPSC और Judiciary के लिए याद रखने योग्य तथ्य
- अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय से संबंधित है।
- इसका मुख्य उद्देश्य पूर्ण न्याय (Complete Justice) करना है।
- यह शक्ति किसी लंबित मामले या विषय में आवश्यक आदेश या डिक्री पारित करने से संबंधित है।
- अनुच्छेद 141 और 142 को आपस में भ्रमित नहीं करना चाहिए।
- अनुच्छेद 141 के तहत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित कानून भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होता है।
- अनुच्छेद 142 का केंद्रबिंदु पूर्ण न्याय है।
निष्कर्ष
अनुच्छेद 142 भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो सर्वोच्च न्यायालय को अपने समक्ष लंबित मामलों में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश और डिक्री जारी करने की संवैधानिक शक्ति देता है। यही कारण है कि यह प्रावधान UPSC, PCS, SSC, Judiciary और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
एक लाइन में याद रखें:
अनुच्छेद 142 = सर्वोच्च न्यायालय की “पूर्ण न्याय” (Complete Justice) की शक्ति।