📈 उत्तराखंड टेस्ट 146
📋 टेस्ट की जानकारी
- 📌 कुल प्रश्न: 30 प्रश्न
- ⏱️ कुल समय: 20 मिनट
- ✅ प्रत्येक सही: 1 अंक
- ❌ नेगेटिव मार्किंग: -0.25
- 📝 टेस्ट कैसे दें: सही विकल्प पर क्लिक/टच करें
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🔑 उत्तर कुंजी
देवीधुरा का बग्वाल मेला: वाराही देवी मंदिर और पाषाण युद्ध का इतिहास
उत्तराखंड अपनी अनूठी लोकसंस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मेलों के लिए प्रसिद्ध है। देवीधुरा का बग्वाल मेला उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध पारंपरिक आयोजनों में से एक है। यह मेला चंपावत जिले के देवीधुरा क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध वाराही देवी मंदिर के प्रांगण में आयोजित किया जाता है।
बग्वाल मेला मुख्य रूप से रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित होने वाला पारंपरिक आयोजन है। इसकी सबसे विशिष्ट पहचान यहां होने वाला पारंपरिक पाषाण युद्ध है। ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार, चार प्रमुख खामों के लोग इस आयोजन में भाग लेते हैं। प्रतिभागी एक-दूसरे पर पत्थर फेंकने की पारंपरिक प्रक्रिया में शामिल होते हैं।
समय के साथ इस परंपरा के स्वरूप में परिवर्तन भी आया है और प्रशासन द्वारा प्रतिभागियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जाती हैं। इसके बावजूद बग्वाल आज भी देवीधुरा की लोकपरंपरा और धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
वाराही देवी मंदिर का महत्व
देवीधुरा स्थित वाराही देवी मंदिर इस मेले का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। मां वाराही को समर्पित यह मंदिर उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बग्वाल के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- बग्वाल मेला: देवीधुरा
- जिला: चंपावत, उत्तराखंड
- प्रमुख मंदिर: वाराही देवी मंदिर
- अवसर: रक्षाबंधन
- प्रमुख विशेषता: पारंपरिक पाषाण युद्ध
- प्रतिभागी: चार प्रमुख खाम
UKPSC, UKSSSC, पटवारी, लेखपाल, पुलिस भर्ती और अन्य उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षाओं में बग्वाल मेले से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इसलिए देवीधुरा, चंपावत, वाराही देवी मंदिर और रक्षाबंधन से इसके संबंध को विशेष रूप से याद रखना उपयोगी है।