📈 उत्तराखंड टेस्ट 145
📋 टेस्ट की जानकारी
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खुड़बुड़ा का युद्ध 1804: राजा प्रद्युम्न शाह और गोरखा शासन का इतिहास
खुड़बुड़ा का युद्ध उत्तराखंड के इतिहास की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है। यह युद्ध 14 मई 1804 को देहरादून के निकट खुड़बुड़ा के मैदान में गढ़वाल के राजा प्रद्युम्न शाह और गोरखा सेना के बीच लड़ा गया था। इस युद्ध में राजा प्रद्युम्न शाह वीरगति को प्राप्त हुए और इसके बाद गढ़वाल के बड़े हिस्से पर गोरखाओं का नियंत्रण स्थापित हो गया।
राजा प्रद्युम्न शाह गढ़वाल के परमार वंश के प्रमुख शासकों में गिने जाते हैं। गोरखाओं के लगातार बढ़ते प्रभाव का सामना करने के लिए उन्होंने अपनी सेना को संगठित किया। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, युद्ध की परिस्थितियां बेहद कठिन थीं और गढ़वाल पक्ष को संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ा।
खुड़बुड़ा का युद्ध क्यों महत्वपूर्ण है?
इस युद्ध के बाद गढ़वाल के इतिहास में एक बड़ा राजनीतिक परिवर्तन आया। राजा प्रद्युम्न शाह की मृत्यु के पश्चात गोरखा शक्ति का प्रभाव तेजी से बढ़ा और गढ़वाल क्षेत्र में गोरखा शासन का दौर शुरू हुआ। यह काल उत्तराखंड के इतिहास में गोरखा शासन के नाम से जाना जाता है।
बाद में अंग्रेजों और गोरखाओं के बीच हुए अंग्रेज-गोरखा युद्ध के परिणामस्वरूप गोरखा सत्ता का अंत हुआ और गढ़वाल के राजनीतिक इतिहास में एक नया चरण शुरू हुआ।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- युद्ध: खुड़बुड़ा का युद्ध
- वर्ष: 1804 ई.
- स्थान: खुड़बुड़ा, देहरादून
- गढ़वाल के राजा: प्रद्युम्न शाह
- प्रतिद्वंद्वी: गोरखा सेना
- ऐतिहासिक परिणाम: गढ़वाल में गोरखा शासन का विस्तार
UKPSC, UKSSSC, पटवारी, लेखपाल, PCS और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तराखंड के इतिहास से जुड़े प्रश्नों में खुड़बुड़ा का युद्ध, प्रद्युम्न शाह और गोरखा शासन महत्वपूर्ण तथ्य हैं। इसलिए इस घटना की तिथि, स्थान और संबंधित शासक को विशेष रूप से याद रखना चाहिए।